ठाकुरगंज : पंचायत चुनाव की आहट के साथ ठाकुरगंज के गांवों में राजनीतिक हलचल बढ़ने लगी थी. संभावित प्रत्याशियों ने जनसंपर्क बढ़ाने और चुनावी तैयारियां शुरू करने की रणनीति बनानी शुरू कर दी थी. इसी बीच पंचायत परिसीमन की चर्चा ने चुनावी गणित को उलझा दिया है. अब भावी प्रत्याशी असमंजस में हैं कि चुनावी अभियान शुरू करें तो किस पंचायत और किस वार्ड से.
2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों और पंचायत प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया की चर्चा सामने आने के बाद संभावित उम्मीदवारों की बेचैनी बढ़ गयी है. दावेदारों को डर है कि परिसीमन के बाद पंचायत की सीमा बदल गयी तो अब तक की उनकी पूरी रणनीति और जनसंपर्क अभियान को नए सिरे से तैयार करना पड़ सकता है.
जनसंपर्क की तैयारी, लेकिन कदम रुके
कई संभावित प्रत्याशी गांव-गांव संपर्क बढ़ाने की तैयारी में जुटे थे. सामाजिक आयोजनों में भागीदारी से लेकर मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद भी शुरू हो चुकी थी. लेकिन परिसीमन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से अब अधिकांश दावेदार खुलकर अभियान शुरू करने से पहले इंतजार करना बेहतर समझ रहे हैं.
सबसे बड़ी चिंता पंचायत और वार्ड की सीमा को लेकर है. किसी गांव या टोले के दूसरी पंचायत में शामिल होने से उम्मीदवारों का पूरा वोट समीकरण बदल सकता है. यही कारण है कि अब दावेदारों की नजर चुनावी मैदान से ज्यादा परिसीमन के संभावित नक्शे पर टिकी है.
आरक्षण को लेकर भी बढ़ी धड़कन
परिसीमन के साथ आरक्षण व्यवस्था में संभावित बदलाव की चिंता भी दावेदारों को सता रही है. मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य और जिला परिषद सदस्य पद की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों को आशंका है कि जिस सीट को वे अपने लिए सुरक्षित मानकर चल रहे हैं, वह नई व्यवस्था में उनके अनुकूल रहेगी या नहीं.
कई दावेदारों ने पहले ही जनसंपर्क और अन्य तैयारियों में समय और संसाधन लगाना शुरू कर दिया था. अब वे आगे खर्च करने से पहले सीट की स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहे हैं.
‘पहले सीमा तय हो, फिर बनेगी रणनीति’
दावेदारों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा यही है कि पहले पंचायत और वार्ड की नई सीमा स्पष्ट हो, इसके बाद ही चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाए. कौन सा गांव किस पंचायत में रहेगा, किस तरह नये वार्ड बनेंगे और कौन सी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी, इन सवालों का जवाब मिलने के बाद ही चुनाव की तस्वीर साफ हो सकेगी.
पुराने राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ेगा असर
परिसीमन का असर सिर्फ पंचायत की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव स्थानीय राजनीति पर भी पड़ सकता है. गांवों और टोलों के जुड़ने या अलग होने से मतदाताओं का समीकरण बदल सकता है. ऐसे में वर्षों से मजबूत माने जाने वाले राजनीतिक समीकरण भी नए सिरे से बन सकते हैं.
फिलहाल ठाकुरगंज में पंचायत चुनाव को लेकर चर्चा तेज है, लेकिन संभावित प्रत्याशियों ने अपने कदम कुछ हद तक रोक रखे हैं. सभी की नजर अब परिसीमन की तस्वीर साफ होने पर है. इसके बाद ही तय होगा कि कौन किस पंचायत और वार्ड से चुनाव मैदान में उतरेगा और किसका राजनीतिक गणित बनेगा या बिगड़ेगा.
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