परिसीमन से अटके पंचायत चुनाव? किशनगंज में उम्मीदवारों की बढ़ी बेचैनी, बदल सकता है पंचायत-वार्ड का भूगोल

किशनगंज में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर नई परिसीमन प्रक्रिया ने संभावित उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा दी है. परिसीमन, वार्डों के पुनर्गठन और आरक्षण रोस्टर में बदलाव की संभावनाओं के चलते चुनाव कार्यक्रम में देरी हो सकती है. इसका सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा.

किशनगंज : बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर प्रशासनिक हलचल के बीच ग्राम पंचायतों के नए सिरे से परिसीमन की चर्चा ने संभावित उम्मीदवारों की बेचैनी बढ़ा दी है. परिसीमन, सीमांकन, वार्डों के पुनर्गठन और आरक्षण रोस्टर तय होने की प्रक्रिया के कारण चुनाव कार्यक्रम में देरी की संभावना जतायी जा रही है. हालांकि चुनाव की वास्तविक तारीख और देरी की अवधि का अंतिम निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक कार्यक्रम से ही स्पष्ट होगा.

क्यों हो रहा है परिसीमन?

पंचायती राज व्यवस्था में पिछले चुनाव के बाद कई ग्रामीण क्षेत्र नगर परिषद और नगर पंचायतों में शामिल हुए हैं. ऐसे में पंचायतों की वर्तमान सीमाओं और 2011 की जनगणना के आधार पर क्षेत्रों के पुनर्गठन की जरूरत सामने आयी है.

नये परिसीमन के बाद कई पंचायतों और वार्डों की सीमाएं बदल सकती हैं. कुछ गांव दूसरे पंचायत क्षेत्र में जा सकते हैं, जबकि नये वार्ड भी गठित हो सकते हैं. इसका सीधा असर स्थानीय चुनावी समीकरण पर पड़ेगा.

उम्मीदवारों की तैयारी पर लगा ब्रेक

परिसीमन की चर्चा से सबसे ज्यादा परेशानी उन संभावित प्रत्याशियों को हुई है, जो लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे थे. मुखिया, सरपंच, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और वार्ड सदस्य पद के दावेदारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया था.

कई संभावित उम्मीदवार बैनर-पोस्टर, बैठक और जनसंपर्क पर समय और पैसा खर्च कर चुके हैं. अब पंचायत और वार्ड की सीमा बदलने की आशंका के बीच उन्हें अपनी पूरी रणनीति दोबारा तैयार करनी पड़ सकती है.

आरक्षण रोस्टर बदलने का भी डर

परिसीमन के बाद आरक्षण रोस्टर का पुनर्निर्धारण भी दावेदारों के लिए बड़ी चिंता है. जिस सीट को लेकर कोई उम्मीदवार वर्षों से तैयारी कर रहा है, उसके महिला, अति पिछड़ा, अनुसूचित जाति या अन्य आरक्षित श्रेणी में जाने की स्थिति में उसकी चुनावी तैयारी बेकार हो सकती है.

चुनाव में देरी होने पर संभावित प्रत्याशियों के सामने मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ेगी.

पंचायतों का कार्यकाल खत्म हुआ तो क्या होगा?

मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के करीब है. ऐसे में यदि परिसीमन और अन्य प्रक्रियाओं के कारण समय पर चुनाव नहीं हो पाते हैं, तो पंचायतों के प्रशासनिक संचालन के लिए सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्णय लेना पड़ सकता है. इसका स्वरूप सरकार के अगले आदेश और आधिकारिक अधिसूचना से स्पष्ट होगा.

अब आधिकारिक कार्यक्रम का इंतजार

किशनगंज में संभावित प्रत्याशियों से लेकर ग्रामीण मतदाताओं तक पंचायत चुनाव को लेकर चर्चा तेज है. प्रशासनिक स्तर पर योजनाओं और जनशिकायतों के निबटारे की प्रक्रिया जारी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई पंचायत और वार्ड की तस्वीर कब साफ होगी और चुनाव आखिर कब होंगे?

फिलहाल संभावित उम्मीदवारों और मतदाताओं को परिसीमन की अंतिम प्रक्रिया तथा राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम का इंतजार है.

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By Prabhat khabar news desk

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