ठाकुरगंज गुरुवार सुबह से लगातार हो रही बारिश ने सीमांचल के चाय उद्योग में नई उम्मीद जगा दी है. चाय बागानों की भाषा में इस मौसम की उपज को “ऑटम फ्लश” कहा जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस बारिश का पूरा लाभ नवंबर में मिलेगा, जब विशेष स्वाद और सुगंध वाली उच्च गुणवत्ता की चाय की पत्तियां तैयार होंगी.ऐसी वर्षा के बिना ऐसी गुणवत्ता वाली चाय संभव ही नहीं होती. इस बाबत चाय उत्पादक किसान संजय साह ने कहा कि नवंबर के उत्पादन के लिए यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं है. बताते चले ठाकुरगंज और पोठिया प्रखंड के लगभग सभी इलाकों में कहीं न कहीं अच्छी बारिश हो रही है और शनिवार को भी इसके जारी रहने की संभावना है. धीमी रफ्तार की इस बारिश से न केवल पेड़ भीग रहे हैं, बल्कि मिट्टी में भी नमी धीरे-धीरे समा रही है. ठाकुरगंज में चाय की खेती करने वाले जयंतो लाहिड़ी ने कहा अब बस धूप निकलने की जरूरत है, फिर सब ठीक. उम्मीद है रविवार से धूप मिलने लगेगी. वही चुरली के अरुण सिंह ने कहा कि असली ऑटम फ्लश इसी तरह की परिस्थिति में मिलता है, इसमें अब कोई संशय नहीं उन्होंने कहा की अगर कुल मिलाकर डेढ़ इंच के आसपास बारिश होती है, तो इससे रेड स्पाइडर जैसे कीटों की संख्या भी घटेगी . यह अनुभव पहले भी मिला है. इसलिए इस ‘मध्य-कार्तिक’ की बारिश का स्वागत हो रहा है. वहीं गलगलिया के चाय उत्पादक किसान संजय राय ने कहा कि ऐसी संतुलित वर्षा से हेमंतकालीन चाय का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में ही वृद्धि होगी. उन्होंने कहा “कालीपूजा के बाद से ही ऑटम फ्लश की उम्मीद रहती है, लेकिन यह कई कारकों पर निर्भर करता है. इनमें सबसे अहम है हल्की बारिश, जो गुरुवार सुबह से शुरू हुई है. मोंथा चक्रवात के अप्रत्यक्ष प्रभाव से सीमांचल में हुई यह बारिश निश्चित रूप से चाय उद्योग को ताजगी और नयी ऊर्जा दे गई है इसमें कोई संदेह नहीं.
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