क्लबफुट से मुक्ति की दिशा में ठोस कदम

जन्मजात बीमारियों व शारीरिक विकृतियों से जूझ रहे बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आज केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज के सबसे कमजोर तबके के लिए जीवन बदलने वाली पहल बन चुका है

आरबीएसके बना जरूरतमंद बच्चों के लिए आशा और संबल का मजबूत आधार

किशनगंज

जन्मजात बीमारियों व शारीरिक विकृतियों से जूझ रहे बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम आज केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज के सबसे कमजोर तबके के लिए जीवन बदलने वाली पहल बन चुका है. यह कार्यक्रम बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में ही जांच कर गंभीर बीमारियों की पहचान करता है और उन्हें महंगे इलाज के बोझ से मुक्त करते हुए निशुल्क विशेषज्ञ उपचार तक पहुंचाता है. गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए, जहां इलाज की लागत अक्सर असंभव हो जाती है, वहीं आरबीएसके ने यह साबित किया है कि सही समय पर पहचान और सरकारी सहयोग से बच्चा विकलांगता से बचकर सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है. इसी कड़ी में आज क्लबफुट से पीड़ित दो बच्चों रफिया नाज और सिदर फातमी को सदर अस्पताल किशनगंज से निशुल्क इलाज के लिए जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भेजा गया. यह रेफरल आरबीएसके के अंतर्गत पूरी प्रक्रिया के साथ किया गया, ताकि बच्चों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में समय पर इलाज मिल सके और भविष्य में किसी तरह की स्थायी परेशानी न हो.

क्लबफुट क्या है और इलाज में देरी क्यों खतरनाक

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि क्लबफुट एक जन्मजात विकृति है, जिसमें बच्चे के पैर अंदर की ओर मुड़े होते हैं. यदि शुरुआती महीनों में इसका उपचार न हो, तो आगे चलकर बच्चे को चलने-फिरने, पढ़ाई और सामाजिक जीवन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सही समय पर इलाज से क्लबफुट को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है और बच्चा सामान्य बच्चों की तरह जीवन जी सकता है.

समय पर इलाज से बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि क्लबफुट जैसी जन्मजात समस्या का यदि समय रहते इलाज हो जाए, तो बच्चा पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है. आरबीएसके के माध्यम से आज दो बच्चों को जेएलएनएमसीएच भागलपुर भेजा गया है. यह इलाज पूरी तरह निशुल्क है. मैं सभी अभिभावकों से अपील करता हूं कि बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और किसी भी असामान्यता पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें.

सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं

जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा कि हर बच्चे का स्वस्थ जीवन प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है. क्लबफुट जैसी समस्याओं का समय पर इलाज जरूरी है. अभिभावक सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ लें और बच्चों को नियमित जांच के लिए अस्पताल लाएं. जिले में आरबीएसके की जिला टीम लगातार गांव-गांव जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग कर रही है, ताकि क्लबफुट सहित अन्य जन्मजात विकृतियों की समय रहते पहचान हो सके. टीम का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा केवल जानकारी या संसाधन के अभाव में इलाज से वंचित न रह जाए.

स्वास्थ्य विभाग का संकल्प

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने बताया कि हर बच्चा स्वस्थ, हर परिवार सुरक्षित हो इसके लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर बच्चे को समय पर पहचान, इलाज और एक बेहतर भविष्य मिल सके.

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By AWADHESH KUMAR

AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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