ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को आधुनिक और सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हाल ही में लगाया गया 'कोच इंडिकेशन डिस्प्ले सिस्टम' (Coach Indication Display System) शुरू होते ही सवालों के घेरे में आ गया है. जिस आधुनिक व्यवस्था के जरिए ट्रेन आने से पहले यात्रियों को उनके कोच की सटीक लोकेशन मिलनी थी, वही डिस्प्ले बोर्ड अब तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े हैं. इसके चलते स्टेशन पहुंचे यात्री पुराने दिनों की तरह प्लेटफॉर्म पर अपने कोच की तलाश में इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं.
सुगमता की जगह प्लेटफॉर्म पर अफरा-तफरी का माहौल
रेलवे द्वारा प्लेटफॉर्म के विभिन्न हिस्सों में कोच इंडिकेशन डिस्प्ले लगाने का मुख्य उद्देश्य यह था कि ट्रेन आने से पहले ही यात्रियों को पता चल सके कि स्लीपर, एसी या जनरल कोच कहां रुकेंगे:
- यात्रियों को होती राहत: इस सुविधा से स्टेशन पर अनावश्यक भागदौड़ रुकती और विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगों तथा बच्चों के साथ यात्रा कर रहे परिवारों को काफी आसानी होती.
- डिस्पले पर दिख रहे अजीब कोड: वर्तमान में कई स्थानों पर लगे डिस्प्ले बोर्ड पूरी तरह बंद हैं, जबकि कुछ बोर्ड्स पर केवल
001.006जैसे तकनीकी कोड या अंक ही दिखाई दे रहे हैं, जिससे यात्रियों को कोई सही जानकारी नहीं मिल पा रही है.
रखरखाव और गुणवत्ता पर उठे सवाल
स्टेशन पहुंचे यात्रियों का कहना है कि रेलवे द्वारा आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करना सराहनीय कदम है, लेकिन कुछ ही दिनों में उपकरण का खराब हो जाना उसकी गुणवत्ता और मेंटेनेंस पर गंभीर सवाल खड़े करता है:
यात्रियों का कहना: "ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आते ही अफरा-तफरी मच जाती है. डिस्प्ले काम न करने की वजह से लोगों को दूसरे यात्रियों, कुलियों या रेलकर्मियों से कोच पूछकर एक छोर से दूसरे छोर तक भागना पड़ता है. इससे हादसा होने का डर भी बना रहता है."
रेलवे प्रशासन से त्वरित सुधार की मांग
स्थानीय निवासियों और दैनिक यात्रियों ने रेल प्रशासन (NFR) व संबंधित तकनीकी विभाग से मांग की है कि:
- स्टेशन पर खराब पड़े सभी कोच इंडिकेशन डिस्प्ले बोर्ड्स का अविलंब तकनीकी निरीक्षण कराकर उन्हें चालू किया जाए.
- सिस्टम के नियमित रखरखाव और मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि यात्रियों को इस आधुनिक सुविधा का पूरा लाभ मिल सके.
