सीमांचल के किशनगंज जिला अंतर्गत टेढ़ागाछ प्रखंड की चिल्हनियां पंचायत स्थित वार्ड नंबर 15 पिछले दो दशकों से विकास की रोशनी से पूरी तरह अछूता है. सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के लिए लाखों-करोड़ों रुपये का बजट खर्च किए जाने के दावे के बावजूद इस वार्ड की तस्वीर नहीं बदल सकी है. कच्ची सड़कें, जर्जर गालियां-नालियां, स्ट्रीट लाइट का अभाव और बंद पड़ी नल-जल योजना जैसी बुनियादी समस्याओं के कारण आज भी स्थानीय लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं.
"कागजों तक सीमित रहा विकास, कभी नहीं बुलाई गई ग्राम सभा"
वार्ड नंबर 15 के निवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उदासीनता के कारण उनका क्षेत्र उपेक्षा का शिकार बना हुआ है:
- जनप्रतिनिधियों पर आरोप: स्थानीय पूर्व सरपंच त्रिवेणी कुमार, तेजनारायण बहरदार, मनोज कुमार, हब्बू लाल यादव, नीरज यादव, धुरखेलिया ऋषिदेव, अजय ऋषिदेव और बिदेशी ऋषिदेव सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य या जिला परिषद सदस्य ने कभी क्षेत्र का दौरा नहीं किया.
- चर्चा तक नहीं हुई: ग्रामीणों का आरोप है कि आज तक गांव के विकास या आवागमन सुलभ बनाने के लिए किसी ग्राम सभा में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया और न ही कोई चर्चा कराई गई.
बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव
| योजना/सुविधा | धरातल की स्थिति |
| आवागमन व सड़कें | आज भी कच्ची सड़कें, हल्की बारिश में कीचड़ और जलजमाव |
| नल-जल योजना | योजना का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंचा, पेयजल संकट |
| स्ट्रीट लाइट व सफाई | गलियां अंधेरे में डूबीं, स्वच्छता अभियान का असर शून्य |
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से की उच्चस्तरीय जांच की मांग
वार्ड नंबर 15 से जुड़े बिहार मुसहरी टोला, देवरी और हेदला चौक के ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है.
ग्रामीणों ने किशनगंज के जिला पदाधिकारी (DM) को आवेदन भेजकर मांग की है कि चिल्हनियां पंचायत के वार्ड नंबर 15 में विगत 20 वर्षों (दो दशकों) के दौरान संचालित सभी विकासात्मक योजनाओं की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. ग्रामीणों का कहना है कि जांच होने पर सरकारी राशि के गबन और योजनाओं में हुई भारी अनियमितताओं की पोल खुल जाएगी.
