दो वर्षों से अधूरा पड़ा 2.05 करोड़ का पुल: टेढ़ागाछ में ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें

Balwadangi Bridge Construction: किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड में विकास दावों की पोल खुल गई है. डाकपोखर पंचायत के बलवाडांगी में दो साल से बंद पड़े पुल निर्माण कार्य और डायवर्सन न होने के कारण बारिश आते ही ग्रामीणों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क कटने की कगार पर है.

किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट

Balwadangi Bridge Construction: किशनगंज जिले के सुदूर सीमावर्ती टेढ़ागाछ प्रखंड में प्रशासनिक लापरवाही और संवेदक की उदासीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है. प्रखंड की डाकपोखर पंचायत अंतर्गत बलवाडांगी (वार्ड संख्या-14) में एक महत्वपूर्ण पुल का निर्माण कार्य पिछले लगभग दो वर्षों से अधर में लटका हुआ है. पुल का निर्माण कार्य अचानक बंद हो जाने से स्थानीय ग्रामीणों को प्रतिदिन आवागमन में भारी और जानलेवा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. मानसून की सक्रियता के बीच उफनती नदियों और कीचड़ से परेशान स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से पुल निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कराने तथा आपातकालीन स्थिति को देखते हुए तब तक वहां अस्थायी आवागमन की मुकम्मल व्यवस्था करने की गुहार लगाई है.

2.05 करोड़ की योजना; शिलान्यास के बाद संवेदक ने खड़े किए हाथ

  • करोड़ों का बजट: स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व विधायक अंजार नईमी ने मार्च 2024 में लगभग 2.05 करोड़ रुपये (205.63 लाख) की भारी-भरकम प्राक्कलित राशि से इस महत्वपूर्ण पुल निर्माण कार्य का भव्य शिलान्यास किया था.
  • काम छोड़कर भागा ठेकेदार: शिलान्यास के बाद संवेदक (ठेकेदार) द्वारा केवल शुरुआती पिलर और प्रारंभिक आधार (फाउंडेशन) का निर्माण कराया गया, लेकिन उसके तुरंत बाद काम को अचानक ठप कर दिया गया. इसके बाद से आज तक निर्माण स्थल पर कोई मजदूर या मशीन दोबारा नजर नहीं आई.
  • प्रशासनिक चुप्पी: ग्रामीणों का कहना है कि दो साल बीत जाने के बाद भी उन्हें या पंचायत प्रतिनिधियों को आज तक विभाग द्वारा यह नहीं बताया गया है कि आखिर इतनी बड़ी राशि स्वीकृत होने के बावजूद काम क्यों बंद किया गया है.

डायवर्सन न होने से टापू बना बलवाडांगी; मरीज और छात्र बेहाल

बलवाडांगी के ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि संवेदक द्वारा लोगों की आवाजाही के लिए कोई डायवर्सन मार्ग नहीं बनाया गया. अब स्थिति यह है कि मानसून की हल्की बारिश होते ही पुराने कच्चे रास्ते पर भारी जलजमाव और दलदल की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. वहीं मूसलाधार बारिश होने पर गांव का संपर्क बाकी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है. इसका सीधा असर बलवाडांगी के हजारों लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें आवश्यक कार्यों, इलाज और जरूरी राशन के लिए प्रखंड व जिला मुख्यालय जाने में भारी कठिनाई हो रही है.

इस संकट के कारण सबसे अधिक परेशानी स्कूली छात्र-छात्राओं, गंभीर रूप से बीमार मरीजों, बुजुर्गों और अपनी फसलों को कृषि मंडियों तक ले जाने वाले किसानों को उठानी पड़ रही है.

Balwadangi Bridge Construction: ग्रामीणों ने की ईंट-गिट्टी डलवाकर रास्ता बहाल करने की मांग

  • त्वरित समाधान: जब तक पुल का मुख्य निर्माण कार्य दोबारा शुरू होकर पूरा नहीं हो जाता, तब तक नदी के एप्रोच मार्ग पर ईंट, गिट्टी, बोल्डर या अन्य उपयुक्त सामग्री डालकर अस्थायी सड़क बनाई जाए.
  • बरसाती सुरक्षा: जलस्तर बढ़ने की स्थिति में आपातकालीन नाव या सुगम पारगमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि लोग सुरक्षित आ-जा सकें.
  • जवाबदेही और ब्लैकलिस्ट: सरकारी राशि का उठाव कर काम अधूरा छोड़ने वाली निर्माण एजेंसी की जांच कर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए.

प्रबुद्ध नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने इस दिशा में अविलंब कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में उफनती नदी को पार करने के दौरान कोई भी बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी.

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By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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