– पूजा समितियों और सामाजिक संगठनों की भूमिका रही अहम किशनगंज लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व छठ का दूसरा अर्घ मंगलवार को सूर्य की पहली किरण के साथ दिया गया. सोमवार को पहला अर्घ्य देने के बाद दूसरे अर्घ के लिए आधी रात के बाद से ही आस्था का जन सैलाब छठ घाटों पर उमड़ने लगा और अर्घ्य देने के साथ ही महापर्व का समापन हो गया. इसके पूर्व पहला अर्घ अस्ताचलगामी भगवान दिनकर को पूरी भक्ति और श्रद्धा के साथ दिया गया. पूजा के दौरान भक्ति चरम पर दिखी. उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रतियों ने पारण के साथ अपने 36 घंटे के निर्जला व्रत को समाप्त किया. शहर से लेकर नेपाल के सीमा सहित गांव स्थित घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही. हर तरफ छठी मइया की भक्ति दिख रही थी. छठ के गीतों से वातावरण गुंजायमान रहा. अर्घ्य देने के पूर्व व्रतियों ने पानी में खड़े होकर सूर्य का ध्यान लगाया, शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में स्थित छठ घाटों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था. लाइटिंग की सजावट देखते ही बन रही थी. सूर्योदय से पहले घाटों और तालाबों के किनारे जाने के लिए निकले व्रती उदयीमान सूर्य को अर्घ देने के लिए अहले सुबह सूर्योदय होने से घंटों पहले ही लोग अपने-अपने घरों से घाटों और तालाब के लिए निकल पड़े थे. पुरुष अपने-अपने माथे पर दोउरा में पूजन सामग्री लिए व्रतियों के साथ आ रहे थे. महिलाएं छठ मइया के गीत गाते हुए घाट किनारे आगे बढ़ रही थी. सोमवार को सांध्यकालीन अर्घ के बाद व्रतियों ने विधिपूर्वक कोसी भरा इसके बाद पूजा की गयी.कौसी का दीप जलाया. पहला अर्घ देने के बाद रात्रि पहर घर पर दीप जलाकर पूजा की गयी. देर रात घाट पर दीप जलाया गया, नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय लोक उपासना के पर्व छठ की शुरूआत शनिवार को हुई थी. पर्व के दूसरे दिन रविवार को खरना की पूजा की गयी. सोमवार को सांध्यकालीन अर्घ के बाद मंगलवार को प्रातःकालीन अर्घ्य दिया गया. घाटों पर थे पुख्ता सुरक्षा के इंतजाम छठ घाटों की स्थिति पर प्रशासन के अधिकारी नजर रखे हुए थे, घाटों पर सुरक्षा के लिए दंडाधिकारी, पुलिस अधिकारी के अलावा पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गयी थी. एनडीआरएफ की टीम को सक्रिय कर रखा गया था जबकि चलंत चिकित्सा दल भी घाटों पर मौजूद थे.
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