मछली पालन में एआई और नयी तकनीक पर चर्चा, अर्राबाड़ी कॉलेज में जुटे विशेषज्ञ

किशनगंज के मात्स्यिकी महाविद्यालय में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विशेषज्ञों और हितधारकों की बैठक हुई. इसमें AI, IoT, यांत्रिकीकरण और मूल्य-श्रृंखला को मजबूत करने जैसे विषयों पर चर्चा की गई.

Fisheries Innovation Kishanganj: किशनगंज के पोठिया प्रखंड स्थित मात्स्यिकी महाविद्यालय, अर्राबाड़ी में मात्स्यिकी और जलीय कृषि क्षेत्र में नवाचार व उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों का जुटान हुआ. राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान के मैनेज-फिशब, हैदराबाद और बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के सहयोग से मात्स्यिकी नवाचारों एवं जलीय उद्यमिता हितधारकों की बैठक आयोजित की गयी.

कार्यक्रम में मत्स्य पालकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और उद्यमियों के साथ वित्तीय संस्थानों, उद्योग, सरकारी विभागों, सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और अकादमिक एवं शोध संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया. बैठक का मुख्य उद्देश्य मात्स्यिकी और जलीय कृषि में नयी तकनीक अपनाने, स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा किसानों, वैज्ञानिकों, उद्योग और वित्तीय संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करना रहा.

एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के इस्तेमाल पर चर्चा

उद्घाटन सत्र में मात्स्यिकी महाविद्यालय के डीन डॉ. वेद प्रकाश सैनी ने कॉलेज की शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों, मत्स्य किसानों, युवा उद्यमियों और उद्योग जगत को नये विचारों और तकनीकों से जोड़ने का अवसर देते हैं.

कार्यक्रम में इंटरनेट ऑफ थिंग्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के अनुप्रयोगों पर विशेष चर्चा हुई. इसके अलावा जलीय कृषि में यांत्रिकीकरण और नवाचार, मत्स्य अपशिष्ट से आय के अवसर, एकीकृत एवं समन्वित मत्स्य पालन, मत्स्य पालन में इनपुट और चारा तकनीक तथा मत्स्य आनुवांशिकी और तकनीक जैसे विषयों पर भी विचार रखे गये.

तालाब प्रबंधन से कोल्ड चेन तक तकनीक पर जोर

बैठक में मछली पालन के बाद की प्रक्रिया, मत्स्य उत्पादों के प्रबंधन, तालाब प्रबंधन और कोल्ड चेन में नवाचार जैसे विषयों को भी चर्चा में शामिल किया गया. विशेषज्ञों और हितधारकों ने मत्स्य क्षेत्र में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और मूल्य-श्रृंखला को मजबूत करने के अवसरों पर विचार किया.

आयोजन में स्टार्टअप और उद्यमियों को अपने उत्पादों और तकनीकों को प्रदर्शित करने तथा संभावित व्यावसायिक साझेदारों और मार्गदर्शकों से जुड़ने के अवसरों पर भी चर्चा हुई. नये सहयोग और व्यावसायिक संभावनाओं की तलाश को भी कार्यक्रम का अहम हिस्सा बताया गया.

शिक्षा, शोध और उद्योग को एक मंच पर लाने की पहल

डीन डॉ. वीपी सैनी ने कहा कि यह आयोजन मात्स्यिकी शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग को एक मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. उन्होंने कहा कि किशनगंज में इस तरह के आयोजन से विद्यार्थियों, मत्स्य किसानों और युवा उद्यमियों को नयी तकनीकों और विचारों की जानकारी मिलेगी.

उन्होंने उम्मीद जतायी कि हितधारकों की यह बैठक मात्स्यिकी क्षेत्र में नवाचार, रोजगार और उद्यमिता की संभावनाओं को आगे बढ़ाने में उपयोगी होगी. साथ ही बिहार में सतत मत्स्य विकास और नीली अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी इसका योगदान हो सकता है.

Fisheries Innovation Kishanganj: विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने रखे विचार

कार्यक्रम में मत्स्य सहकारी समिति के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप, पूर्णिया प्रमंडल के मत्स्य उप निदेशक शंभू कुमार, नाबार्ड पटना के सहायक महाप्रबंधक डॉ. अनुपम लाल कुसुमाकर तथा बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. निर्मल सिंह दहिया ने प्रतिभागियों को संबोधित किया.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय कृषि विज्ञान परिषद कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-4 पटना के पूर्व निदेशक डॉ. अंजनी कुमार ने मात्स्यिकी क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता के महत्व पर विचार रखे.

बैठक में मत्स्य स्टार्टअप, एक्वाप्रेन्योर, मत्स्य पालक, विद्यार्थी, शोधकर्ता, वित्तीय संस्थान, सरकारी विभाग, उद्योग, सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह, इनक्यूबेटर और नवाचार केंद्रों से जुड़े हितधारक शामिल हुए.

फोटो- कार्यक्रम में शामिल मत्स्य पालक व अन्य. | Prabhat Khabar Network

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By अवधेश कुमार

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