किशनगंज में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को मिली गति, ज्ञान भरतम अभियान के तहत ऐतिहासिक पांडुलिपियां मिली किशनगंज पांडुलिपि सर्वेक्षण व डिजिटलीकरण अभियान के अंतर्गत जिले में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा है. यह अभियान ज्ञान भरतम् मिशन, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार व कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया गया. यह मिशन माननीय प्रधानमंत्री के प्रमुख फ्लैगशिप कार्यक्रमों में से एक है. इस अभियान के अंतर्गत 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों की पहचान कर उन्हें ज्ञान भरतम पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है. साथ ही इन पांडुलिपियों का डिजिटल रूपांतरण भी किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह अमूल्य धरोहर सुरक्षित रह सके. यह पहल शोधार्थियों, विद्यार्थियों, इतिहासकारों एवं विद्वानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी तथा आम नागरिकों को भी अपनी संस्कृति, परंपरा, इतिहास और सभ्यता से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगी. इसी क्रम में जिला प्रशासन ने जिला स्तर पर एक समिति का गठन किया है. इस समिति के नोडल पदाधिकारी प्रदीप कुमार झा, उप विकास आयुक्त के नेतृत्व में जिले के विभिन्न ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का सतत भ्रमण किया जा रहा है. अभियान के अंतर्गत मस्जिदों, मदरसों, मंदिरों, निजी पुस्तकालयों एवं ऐतिहासिक कोठियों में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा रहा है. इसी कड़ी में जिला पदाधिकारी विशाल राज ने खगड़ा स्थित नवाब साहब की ऐतिहासिक कोठी का भ्रमण किया. इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार झा, जिला शिक्षा पदाधिकारी, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी, कृषि कॉलेज किशनगंज के सहायक प्रोफेसर शिव वरन सिंह तथा एआई विशेषज्ञ प्रेम पीयूष भी उपस्थित थे. इस संयुक्त दल ने कोठी में संरक्षित ऐतिहासिक दस्तावेजों एवं पांडुलिपियों का अवलोकन किया. भ्रमण के दौरान खगड़ा स्थित नवाब साहब की हवेली से फारसी, पर्शियन एवं उर्दू भाषा में लिखित लगभग पांच-छह महत्वपूर्ण हस्तलिखित दस्तावेज प्राप्त हुए, जिनमें से कुछ दस्तावेज वर्ष 1916 के आसपास के समय के हैं. ये पांडुलिपियां ऐतिहासिक, भाषाई एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. इन दस्तावेजों को पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत संकलित कर सुरक्षित रूप से डिजिटलीकरण हेतु लिया गया है. इस अवसर पर खगड़ा के अंतिम नवाब साहब के वंशज सैयद मुदस्सर मिर्ज़ा, सैयद ज़ैग़म मिर्ज़ा व सैयद अली अब्बास मिर्ज़ा ने हवेली में संरक्षित इन बहुमूल्य दस्तावेजों को स्वेच्छा से उपलब्ध कराया. डीएम ने उनके इस सराहनीय सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से हमारी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को नई दिशा मिलती है. उन्होंने यह भी कहा कि समाज के सहयोग के बिना इस अभियान को सफल बनाना संभव नहीं है. जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास या उनके आसपास किसी भी प्रकार की पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियां उपलब्ध हों, तो वे इस राष्ट्रीय अभियान में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें. पांडुलिपियों की जानकारी मोबाइल ऐप या ज्ञान भरतम पोर्टल के माध्यम से अपलोड की जा सकती है. ज्ञान भरतम मिशन के माध्यम से न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित होगी, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में भी सहायता मिलेगी. जिला प्रशासन इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है तथा भविष्य में और अधिक पांडुलिपियों के संग्रहण एवं डिजिटलीकरण के लिए कार्य को तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा.
आसपास के पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियां उपलब्ध कराने की आमजनों से डीएम ने की अपील
पांडुलिपि सर्वेक्षण व डिजिटलीकरण अभियान के अंतर्गत जिले में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा है
