शादी की खरीदारी को भारत आना चाहती थी अमेरिकी युवती, बॉर्डर पर घंटों पूछताछ

शादी की ख़रीदारी के लिए नेपाल से भारत आई एक अमेरिकी युवती को सीमा पर घंटों पूछताछ के लिए कैंप में बिठाया गया. युवती अपने मंगेतर के साथ बाज़ार आना चाहती थी, लेकिन दस्तावेज़ों के बावजूद सुरक्षा एजेंसियों ने उसे रोक लिया.

Kishanganj News: शादी की खरीदारी के लिए नेपाल से दिघलबैंक बाजार आने की अनुमति मांगने वाली एक अमेरिकी युवती को भारत-नेपाल सीमा पर घंटों पूछताछ के लिए कैंप में बैठाये जाने का मामला सामने आया है. युवती अपने नेपाली मंगेतर के साथ बाजार आना चाहती थी और सीमा पर तैनात जवानों को अपने दस्तावेज भी दिखाये थे. इसके बावजूद दोनों को पूछताछ के लिए एसएसबी कैंप ले जाया गया. बाद में दिघलबैंक पुलिस ने भी दोनों से पूछताछ की. कोई आपत्तिजनक सामग्री या संदिग्ध गतिविधि नहीं मिलने के बाद दोनों को नेपाल एपीएफ के हवाले कर दिया गया.

मामला दिघलबैंक के मोहामारी सीमा क्षेत्र में पिलर संख्या 130 के पास का है. पुलिस के अनुसार, युवती नेपाल में 90 दिनों के वैध टूरिस्ट वीजा पर रह रही थी और अपने नेपाली मंगेतर के साथ शादी की खरीदारी के लिए दिघलबैंक बाजार आना चाहती थी.

बाजार जाने की अनुमति मांगने खुद जवानों के पास पहुंची युवती

जानकारी के अनुसार, अमेरिकी नागरिक रीति माया कार्की अपने नेपाली मंगेतर के साथ सीमा के पास पहुंची थी. उसका उद्देश्य भारत में लंबे समय तक रुकना नहीं, बल्कि दिघलबैंक बाजार से शादी के लिए कपड़े, गहने और अन्य सामान खरीदना था. दोनों की शादी 21 सितंबर को नेपाल में होने की बात भी सामने आयी है.

पुलिस के मुताबिक, युवती ने सीमा पर तैनात एसएसबी जवान से पूछा कि क्या वह दिघलबैंक बाजार जा सकती है. उसने अपने दस्तावेज भी दिखाये. इसके बाद दोनों से पूछताछ शुरू हुई और उन्हें एसएसबी कैंप ले जाया गया.

यहीं से पूरे मामले को लेकर सवाल उठने लगे हैं. अगर किसी विदेशी नागरिक के पास भारत में प्रवेश के लिए जरूरी भारतीय वीजा नहीं था, तो उसे सीमा पर ही प्रवेश की अनुमति नहीं देना पर्याप्त कार्रवाई थी या नहीं, यह सवाल अब चर्चा में है.

अमेरिकी नागरिक के लिए भारतीय वीजा जरूरी

नेपाल में वैध वीजा पर रहना किसी विदेशी नागरिक को भारत में प्रवेश का स्वत: अधिकार नहीं देता. भारत आने के लिए संबंधित विदेशी नागरिक को भारतीय प्रवेश नियमों का पालन करना होता है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार युवती के पास नेपाल का 90 दिनों का टूरिस्ट वीजा था, लेकिन भारत में प्रवेश के लिए वैध भारतीय वीजा नहीं था.

ऐसे में सीमा सुरक्षा बल द्वारा भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं देना नियमों के अनुरूप हो सकता है. लेकिन सवाल यह है कि दस्तावेज दिखाकर खुद अनुमति मांगने वाली महिला और उसके मंगेतर को घंटों कैंप में रखकर पूछताछ की जरूरत क्यों पड़ी. इसी प्रक्रिया को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाये जा रहे हैं.

हालांकि, एसएसबी की ओर से सामने आये पक्ष में कहा गया है कि युवती को भारतीय सीमा में प्रवेश करने के बाद पकड़ा गया था. इस तरह घटना के शुरुआती क्रम को लेकर पुलिस और एसएसबी के दावों में अंतर सामने आया है.

घंटों जांच के बाद नहीं मिला कोई आपत्तिजनक तथ्य

एसएसबी कैंप में पूछताछ के बाद दोनों को दिघलबैंक थाना लाया गया. पुलिस स्तर पर भी उनके दस्तावेज और पहचान की जांच की गयी. पुलिस के अनुसार जांच के दौरान कोई आपत्तिजनक सामग्री या संदिग्ध गतिविधि सामने नहीं आयी.

इसके बाद दोनों को नेपाल एपीएफ के हवाले कर दिया गया. पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने बताया कि महिला नेपाल में 90 दिनों के वैध टूरिस्ट वीजा पर थी और सीमावर्ती बाजार में खरीदारी के लिए भारत आने की अनुमति चाह रही थी. सत्यापन के बाद दोनों को नेपाल एपीएफ को सौंप दिया गया.

भूटानी शरणार्थी पृष्ठभूमि से जुड़ी है युवती

जांच के दौरान युवती की पृष्ठभूमि भी सामने आयी. रिपोर्टों के अनुसार वह मूल रूप से भूटानी शरणार्थी पृष्ठभूमि से जुड़ी रही है और बाद में अमेरिकी नागरिक बनी. उसका संपर्क नेपाल के झापा जिले के एक युवक से हुआ था. दोनों के बीच सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क बढ़ा और बाद में शादी तय हुई.

इसी शादी की तैयारियों के लिए वह नेपाल पहुंची थी. दोनों दिघलबैंक बाजार से शादी का सामान खरीदना चाहते थे. लेकिन सीमा पर हुई पूछताछ के कारण उनका यह सामान्य खरीदारी का कार्यक्रम सुरक्षा जांच में बदल गया.

सीमा सुरक्षा जरूरी, लेकिन प्रक्रिया पर जवाब जरूरी

भारत-नेपाल सीमा संवेदनशील क्षेत्र है. विदेशी नागरिक की पहचान, दस्तावेज और भारत में प्रवेश की अनुमति की जांच सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है. ऐसे मामलों में सुरक्षा जांच को हल्के में नहीं लिया जा सकता.

लेकिन इस मामले में उठ रहा सवाल सुरक्षा जांच करने को लेकर नहीं, बल्कि अपनायी गयी प्रक्रिया को लेकर है. यदि महिला ने स्वयं जवानों से अनुमति मांगी, अपने दस्तावेज दिखाये और उसका उद्देश्य केवल सीमावर्ती बाजार में खरीदारी करना था, तो उसे कैंप ले जाने और घंटों पूछताछ की परिस्थितियों को स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है.

दूसरी ओर, एसएसबी का पक्ष है कि महिला को भारतीय क्षेत्र में प्रवेश के बाद रोका गया. इसलिए घटना के क्रम को लेकर दोनों पक्षों के बयानों को सामने रखकर ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी.

Kishanganj News: अब एसएसबी की प्रक्रिया पर जवाब का इंतजार

फिलहाल युवती और उसका नेपाली मंगेतर नेपाल लौट चुके हैं. पुलिस जांच में कोई आपत्तिजनक तथ्य नहीं मिलने के बाद उन्हें नेपाल एपीएफ को सौंप दिया गया. ऐसे में अब इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि सीमा पर शुरुआती कार्रवाई किस परिस्थिति में की गयी और कैंप में पूछताछ की जरूरत क्यों पड़ी.

घटना को लेकर एसएसबी और पुलिस के अलग-अलग पक्ष सामने आने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया और उसके आधार को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है. सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाए रखना इस तरह के मामलों में महत्वपूर्ण माना जाता है.

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By अवधेश कुमार

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