किशनगंज : होली की दस्तक के साथ अश्लील गीत एक बार फिर रंग में भंग घोल रहे हैं. बस, ऑटो और ई-रिक्शा में भी मनाही के बावजूद अश्लील गाने बजने शुरू हो गये हैं. इन अश्लील गानों की सबसे बड़ी शिकार होती हैं कॉलेज की छात्राएं. दिन हो या शाम, वे ऐसे गानों से शर्मसार महसूस करती हैं. इसकी रोकथाम के लिए कानूनी प्रावधान बनाये गये हैं.
शर्म से झुक जाती हैं आंखें. इन अश्लील गानों की सबसे बड़ी शिकार होती हैं कॉलेज की छात्राएं. दिन हो या शाम वह आते-जाते ऐसे गानों से अपने आप को शर्मसार महसूस करती हैं. गानों में इतनी अभद्रता होती है कि सामने वाले से नजरें मिलाना मुहाल हो जाता है. अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे लोग भी इन गानों के बजने पर असहज महसूस करते हैं. ड्राइवर को मना करने पर भी वे लोग न तो गाना बदलते हैं और न ही म्युजिक सिस्टम बंद करते हैं.
खत्म होती जा रही है फागुन गानों की परंपरा. इस तरह के गानों से जहां अश्लीलता परोसने की प्रतियोगिता लगी हुई है, वहीं इसके कारण शहर में पारंपरिक होली की परंपरा भी खत्म होती जा रही है. इससे भी सबसे आश्चर्यजनक बात है जब हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद ऐसे गाने स्थानीय चैनलों पर धड़ल्ले से बजाये जा रहे हैं. इससे फाग गाने की परंपरा का भी अंत होता जा रहा है और एक पीढ़ी ही अश्लीलता में डूबती जा रही है.
ये हैं कानूनी प्रावधान : 67 आइटी एक्ट. अगर कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का प्रयोग करके अश्लीलता फैलाने का काम करता है, तो उस व्यक्ति को पांच साल कैद या एक लाख जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है.
67 (ए) आइटी एक्ट. ऐसी सामग्री जिससे अश्लीलता फैलाने का प्रयास किया जाए तो सेक्सुअल एक्सप्लाइट एक्ट के तहत पांच साल कैद और 10 लाख जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.
आइपीसी- 294. अश्लील कार्य या गाना बजाने पर तीन महीन की कैद और जुर्माना का प्रावधान है.
आइपीसी- 509. अश्लील शब्द के प्रयोग इस उद्देश्य से किया गया हो कि इससे किसी स्त्री की लज्जा का अनादर किया गया हो तो एक साल की कैद या जुर्माना का प्रावधान है.
