किशनगंज : केंद्र सरकार के द्वारा मुसलिम पर्सनल लॉ में संशोधन के विरोध में दिघलबैंक प्रखंड के जागिर पदमपुर पंचायत के सुकानदिघी गांव में एक बैठक का आयोजित की गयी़ जिसमें मौलाना मुफ्ती अतहर जावेद कासमी, मो उस्मान, कारी मुजम्मील, हाफिज मिस्बाह, मो मोहद्दीस, मो असीरूद्दीन, जमील अख्तर, हबीब आलम आदि ने कहा कि केंद्र सरकार ने सरिया कानून के खिलाफ जो सर्वोच्च न्यायालय में 16 मुद्दों को लेकर हलफनामा दायर किया है
हमें केंद्र सरकार की इस रुख का बहिष्कार एकजुट हो करने की जरूरत है़ विधि आयोग के माध्यम से केंद्र सरकार शरियत के मामले में बेवजह दखल दे रही है़ संविधान की धारा 25 के तहत मुसलिम पर्सनल लॉ मुसलमानों की बुनियादी हक है़ शरियत एप्लिकेशन 1938 में साफ लिखा है कि मुसलमानों पर उनके सरिया कानून ही लागू होंगे़ इसे लोकसभा और अदालतों को फेरबदल करने का अधिकार नहीं है़ जबकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है़
देश के संविधान में सभी धर्मों के मानने वालों को धार्मिक आजादी दी गई है़ उलेमाओं ने कहा कि विधि आयोग के सवालनामे का बहिष्कार किया जाना चाहिए़ इसलिए विरोध में मुसलिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से जनमत संग्रह के तहत हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है जिसमें सभी को अपनी भागीदारी निभाने की जरूरत है़ उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट और विधि आयोग ने भी इस मसले पर लोगों से राय मांगी है़ बैठक में तीन तलाक, बहुविवाह ,सहित उन सभी 16 मसलों पर विस्तार से चर्चा कर लोगों को इसकी जानकारी से अवगत कराया गया़ इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे़ बैठक में आरजू बेगम, मिन्नत आरा, नसीमा बेगम, मो अनवर आलम सहित अन्य मौजूद थे़
