छिपकली का पारंपरिक चीनी चिकित्सा प्रणाली में किया जाता है प्रयोग
पांच मोबाइल, 1340 रुपये और एक मोटर भी बरामद
चारों तस्करों को नक्सलबाड़ी वन विभाग को कर दिया सुपुर्द
ठाकुरगंज (किशनगंज) : भारत-नेपाल सीमा पर अवस्थित गलगलिया सीमा से सटे चक्करमारी बस पड़ाव से एसएसबी 19वीं वाहिनी के जवानों ने प्रतिबंधित टोके(गीको) छिपकली के साथ चार तस्करों को रंगेहाथ धर-दबोचा. घटना मंगलवार देर शाम की है़ तस्कर बंगाल के डुवार्स के जंगलों से प्रतिबंधित गीको छिपकली लेकर ठाकुरगंज में डिलिवरी करने आये थे़ डिलिवरी के दौरान ही चारों तस्करों को गिरफ्तार कर लिया गया़
एसएसबी के कमांडेंट एंथोनी थानमी ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी कि तस्करों का एक गिरोह प्रतिबंधित गीको छिपकली की डिलिवरी देने ठाकुरगंज की ओर आ रहे हैं. सूचना मिलते ही तुरंत एसआइ मृत्युंजय कुमार के नेतृत्व में एसएसबी की छापेमारी की टीम ने बिहार बंगाल सीमा पर अवस्थित चक्करमारी बस पड़ाव के समीप नाकाबंदी की. सिलीगुड़ी से आ रही एक बस से उतरे दो व्यक्ति अमिताभ क्साल्क्सो पिता विनोद क्साल्क्सो, साकिन मूर्ति
40 लाख की…
टि गार्डन, पोस्ट मेटली जिला जलपाईगुड़ी और रूपेश उरांव पिता ओरन उरांव साकिनसोनाली टि स्टेट, बागराकोट जलपाईगुड़ी निवासी पर निगाह रखनी शुरू कर दी. इन दोनों ने बस स्टैंड के निकट खड़े हीरो होंडा हंक मोटर साइकिल पर सवार दो युवक श्याम टुडू पिता एतवार सिंह टुडू, साकिन गलगलिया, जिला किशनगंज और मैन्युअल सोरेन पिता सुशील सोरेन साकिन मजलिसपुर, उत्तर दिनाजपुर के संग डिलिवरी के संबंध में बातचीत शुरू की.
इसी दौरान एसएसबी जवानों ने चारों को गिरफ्तार कर लिया. इनके पास से एक प्लास्टिक जार में सुरक्षित रखे प्रतिबंधित गीको छिपकली, पांच मोबाइल, 1340 रुपये और एक मोटर को बरामद किया. एंथोनी थानमी ने बताया कि जब्त छिपकली की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 40 लाख रुपये बतायी जा रही है़ श्री थानमी ने बताया कि प्रतिबंधित गीको छिपकली के साथ गिरफ्तार चारों तस्करों से आवश्यक पूछताछ के बाद उन्हें नक्सलबाड़ी वन विभाग को सुपुर्द कर दिया गया है़
मालूम हाे कि यह छिपकली पारंपरिक चीनी चिकित्सा प्रणाली में प्रयोग की जाती है. इस कारण चीन और कई पूर्वी देशों में इसकी तस्करी व्यापक पैमाने पर की जा रही है़ वहीं जानकारों की यदि माने तो कैंसर, अस्थमा, मधुमेह, त्वचा रोग साथ यौन रोगों के इलाज में इसका इस्तेमाल किया जाता है़ वैसे कई लोग तो इस छिपकली का इस्तेमाल एचआइबी/ एड्स से बचाव के लिए बननेवाली दवाओं में इसके इस्तेमाल का दावा करते है़ं
