इसके बाद अफरा-तफरी मच गयी. पीड़ित ड्रेसर ने तत्काल इस घटना की शिकायत सिविल सजर्न डॉ अफाक अहमद लारी से की. आरोपी परिजन के एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ता होने के साथ साथ एक विधायक के काफी करीबी होने को ले भी सदर अस्पताल कर्मियों ने भी मामले में चुप्पी साध ली.
नतीजतन श्री मांझी सदर अस्पताल से निकल गये. वहीं घटना के संबंध में जानकारी प्रदान करते हुए श्री मांझी ने बताया कि गत शनिवार रात्रि धनपुरा रंगामनी निवासी किनुआ पिता सहर अली के शरीर में आग लग जाने के बाद स्थानीय लोगों ने उसे इलाज हेतु सदर अस्पताल में भर्ती कराया था. रविवार के दिन अस्पताल का ओपीडी बंद होने के कारण वे ड्यूटी पर नहीं आये थे. परंतु सोमवार को जब वे ड्यूटी पर आये तो उन्होंने सर्वप्रथम किनुआ का ड्रेसिंग किया था. इसके बावजूद मरीज के परिजन इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए मारपीट करने लगे थे. इस मौके पर श्री मांझी ने कहा कि इस प्रकार के वातावरण में अब कार्य करना कठिन हो गया है. गाहे बगाहे ही मरीज के परिजनों द्वारा अस्पताल कर्मियों के साथ बदसलूकी किये जाने को ले अब अस्पताल कर्मियों में भी असुरक्षा की भावना घर कर गयी है. वहीं अस्पताल के वरीय पदाधिकारी भी इस मामले में चुप्पी साधे रहते हैं.
