डॉ कलाम कृषि कॉलेज में मृदा स्वास्थ्य व पोषक तत्व प्रबंधन पर दिया जा रहा प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम
पहाड़कट्टा. पोठिया प्रखंड के डॉ कलाम कृषि महाविद्यालय में उर्वरक विक्रेताओं के लिए ”एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन” विषय पर 15 दिवसीय स्व-वित्तपोषित आवासीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम के 14वें व 15वें बैच का गुरुवार से शुभारंभ हुआ. यह प्रशिक्षण पाठ्यक्रम मृदा विज्ञान विभाग के मार्गदर्शन और प्रशिक्षण प्रकोष्ठ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है.दीप प्रज्वलित कर हुआ उद्घाटन
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ एसके दत्ता ने मुख्य अतिथि डॉ पीडी माने को पौधा भेंट कर स्वागत किया. इसके बाद मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया. इस पाठ्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों के 60 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो मृदा स्वास्थ्य और वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन में विशेषज्ञता प्राप्त करेंगे.विक्रेताओं की पेशेवर क्षमता होगी सशक्त
मुख्य अतिथि डॉ पीडी माने ने अपने संबोधन में कहा कि उर्वरक कृषि का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है, जिसका वितरण प्रमुख रूप से विक्रेताओं के माध्यम से होता है. ऐसे में यह प्रशिक्षण पाठ्यक्रम विक्रेताओं की पेशेवर क्षमता को सशक्त करने और वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभायेगा. इससे न केवल विक्रेताओं को तकनीकी जानकारी मिलेगी, बल्कि किसानों को भी सही सलाह मिल सकेगी.संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर
नोडल अधिकारी सह पाठ्यक्रम समन्वयक एवं प्रशिक्षण प्रभारी डॉ एसके दत्ता ने प्रतिभागियों को इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने और संतुलित उर्वरक उपयोग की दिशा में सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण उर्वरक व्यवसाय की गहन समझ प्रदान करेगा, जिससे किसान एवं कृषि उद्योग दोनों को लाभ मिलेगा. कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने अपना परिचय दिया और प्रशिक्षण से अपनी अपेक्षाओं को साझा किया.इस अवसर पर डॉ एससी पॉल, डॉ भोलानाथ साहा, डॉ हिना परवीन, श्री मनीष, डॉ रीना रॉय, डॉ केविन क्रिस्टोफर, डॉ श्वेता कुमारी और डॉ अंजलि सुधाकर सहित महाविद्यालय के अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित थे. प्रशिक्षण के माध्यम से विक्रेताओं को मिट्टी की जांच व पोषक तत्वों के सही संतुलन की जानकारी दी जा रही है.
