प्रशासनिक पहल से बेणुगढ़ एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल बनने की ओर अग्रसर

राजा मुराद, टेढ़ागाछ : टेढ़ागाछ के डाकपोखर पंचायत स्थित बेनुगढ़ टीला का सौन्दर्यकरण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. तालाब का सौन्दर्यकरण, म्यूजियम, सार्वजनिक शौचालय, किचन सेड, सामुदायिक भवन, पार्क एवं पौधरोपण का कार्य जारी हैं. कार्य होने से इलाके के लोगों में उम्मीद जगी हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र […]

राजा मुराद, टेढ़ागाछ : टेढ़ागाछ के डाकपोखर पंचायत स्थित बेनुगढ़ टीला का सौन्दर्यकरण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. तालाब का सौन्दर्यकरण, म्यूजियम, सार्वजनिक शौचालय, किचन सेड, सामुदायिक भवन, पार्क एवं पौधरोपण का कार्य जारी हैं. कार्य होने से इलाके के लोगों में उम्मीद जगी हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र पर्यटन स्थल विकसित होने से टेढ़ागाछ को राज्य स्तर पर प्रसिद्ध मिलेगी तथा खोया हुआ अस्तित्व फिर लौट जायेगा, इसके साथ ही टेढ़ागाछ प्रखंड के लाखों लोगों का सपना भी पूरा होता दिखाई दे रहा हैं. जिससे स्थानीय लोग काफी उत्साहित हैं.
क्या हैं बेनुगढ़ का इतिहास
इतिहासकारों के अनुसार टेढ़ागाछ का संबंध महाभारत काल से जुड़ी है़ किदवंती कथा के अनुसार पांडव अज्ञातवास के दौरान बाबा बेणु महाराज के इसी गढ़ में रुके थे. इसी पोखर में नहाते थे और इसी का पानी पीते और खाना बनाते थे़ पोखर और व टीले का अन्य अवशेष अभी भी मौजूद है़ यहीं से निकल कर ठाकुरगंज प्रखंड के गलगलिया स्थित नेपाल सीमा पार भद्रपुर में भीम ने कीचक वध किया था़ वहां अभी भी कीचक वध का मेला लगता है.
क्या हैं मान्यताएं
बुजुर्गों के अनुसार इस टीले में आत्माएं अदृश्य रूप से आज भी विद्यमान है़ टीला चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़ से आच्छादित है़ं इस हरित क्षेत्र में प्रवेश करते ही सुख व नैसर्गिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है़ कहा जाता है कि टीले में दो पोखर थे़ जिस पोखर में पांडव गुप्त वास के दौरान जल ग्रहण किये थे उस तालाब का पानी कभी कम नहीं होता है़ इसी तालाब को लेकर किवदंती है कि जब किसी का शादी विवाह होता था तो इस तालाब को सबसे पहले निमंत्रण देकर बरतन मांगा जाता था.
शादी के ठीक एक दिन पहले तालाब से समान ऊपर आ जाता था. शादी खत्म होने के बाद पुनः बर्तन को तालाब में लाकर रख दिया जाता था. कुछ लोगों द्वारा बर्तन पोखर को वापस नहीं करने पर तालाब से बर्तन मिलना बंद हो गया. दूसरी सबसे खास बात ये है कि इस तालाब में स्नान करने से चर्म रोग दूर हो जाता था.
ठीक उसी के कुछ दूरी में एक सूखा तालाब के नाम से जाना जाता है़ इस तालाब में वर्षा के दिनों में भी पानी नहीं भरता है. लोग इसे दैवी चमत्कार मानते है़ इतिहासकारों का कहना है कि महाभारत काल में यहां महाराजा वेणु महाराज की राजधानी थी. वे भगवान के भक्त, दयावान व बड़े प्रतापी राजा थे़
आज भी डाकपोखर पंचायत के दर्जनों गांव में लोग छोटे-छोटे मंदिर बनाकर उन्हें ग्राम देवता के रूप में पूजते है़ सदियों से यहां बैसाखी के दिन मेला लगता है. महाराज वेणु के मंदिर में हजारों लोग मन्नतें मांगते है़ मन्नतें पूरी होने पर कबूतर और बकरे की बलि दी जाती है़ यह परंपरा सदियों से चली आ रही है़ परंपरा के अनुसार बारह बजे तक मुस्लिम संप्रदाय के श्रदालुओं का तांता लगा रहता है़ उसके बाद हिंदू समुदाय के श्रद्धालु पूजा अर्चना करते है़
डीएम ने कहा कि बेणुगढ़ टीला के सभी तालाबों का सौदर्यीकरण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. तालाबों के चारों ओर आवागमन के लिए सड़कें बनायी जायेगी. पूरे टीले में मनरेगा योजना से पौधरोपण किया जायेगा. चार कमरे का सामुदायिक शौचालय का निर्माण होगा, जिसमें दो महिलाओं व दो पुरुषों के लिए शौचालय बनाया जायेगा. म्यूजियम और सामुदायिक भवन एव सूखे तलाबों का जीर्णोद्धार किया जायेगा. हर वर्ष यहां वैशाखी मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी.

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