मुखिया हारू लाल राम के सिर और हाथ में गोली लगी थी. उस समय वो बाल-बाल बच गये थे. तभी से उनका उपचार चल रहा था.
दिघलबैंक : दिघलबैंक प्रखंड के धनगढ़ा पंचायत के मुखिया हारू लाल राम का शनिवार को निधन हो गया. वे करीब चालीस वर्ष के थे. उनके निधन की खबर से प्रखंड क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी. गौरतलब है कि 8 मई के मध्य रात्रि को अज्ञात अपराधियों ने मुखिया हारू लाल राम के घर (चरघरिया) में घुस कर ताबड़ तोड़ गोलियां दाग दी थी.
जिसमें गोली उनके सर में और हाथ में लगी थी. उस समय वो बाल-बाल बचे थे. तभी से उनका उपचार चल रहा था. पहले पूर्णिया के एक निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया था. बाद में दिल्ली स्थित एम्स में उनका इलाज हुआ. आखिरकार शनिवार को उनका देहांत उनके घर पर ही हो गया. घटना की सूचना बाद उनके घर पर लोगों का जमघट लग गया. गोलीबारी को लेकर बहादुरगंज थाना में मामला दर्ज हुआ था . दिवंगत मुखिया पर हुए जानलेवा हमले के बाद बहादुरगंज थाना में मामला दर्ज हुआ था.
आखिर मुखिया बनते ही जान के दुश्मन क्यों बन गये अपराधी
ज़िन्दगी और मौत के जंग में लगभग सात माह तक जूझने के बाद आखिरकार मुखिया हारू लाल राम की सांसें थम गयी. धनगढ़ा पंचायत ने अपने मुखिया को खो दिया. आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद 2016 के पंचायत चुनाव में हारूलाल ने चुनाव में अपनी किस्मत आजमायी और जनता ने उस पर भरोसा कर उसे अपना मुखिया चुना. लेकिन एक साल भी पूरा नहीं हुआ कि अपराधियों ने उसके घर मे घुसकर मौत के घाट उतारने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी. उस समय किस्मत ने उसका साथ दिया और शल्य चिकित्सा के बाद किसी तरह उसकी जान बच पायी थी. लेकिन छह माह बाद किस्मत ने साथ छोड़ा और उनका निधन हो गया.
घटना के समय कोई कुछ समझ नहीं पाया कि आखिर नव-निर्वाचित मुखिया से किसी की क्या दुश्मनी थी जो उसके जान के पीछे ही पड़ गए. फिल्मी स्टाइल में घटना को दिया था अंजाम. तीन अपराधी में दो ने मुखिया को जगाया और एक अपराधी मोटर साइकिल को स्टार्ट कर उसी पर जमा रहा कि काम पूरा होते ही तुरंत निकल सकें. जैसे ही मुखिया ने दरवाजा खोला अपराधियों ने ताबड़तोड़ गोलियां दाग दी थी. गोली लगने से मुखिया गंभीर रूप से जख्मी हो गये ़
