मेडिकल साइंस के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता
भविष्य में डेंगू जीका बीमारी से बचाव को यह खोज होगी कारगर साबित
ठाकुरगंज प्रखंड के करबलभिट्टा गांव के निवासी हैं डॉ मुमताज नैयर
किशनगंज : किशनगंज के सपूत की एक ऐसी खोज जो भारतीयों यानि विशेषकर सूबे के लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट ले आएगी. किशनगंज जिला निवासी डॉ मुमताज नैयर ने ब्रिटेन के साउथ थेम्प्टन विश्वविद्यालय के अपने सहयोगी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर दुनिया के सबसे खतरनाक बीमारियों में शुमार हेपेटाइटिस सी, डेंगू व जीका वायरस सहित अन्य विषाणु के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण खोज की है. मालूम हो कि डॉ नैयर पिछले पांच सालों से इन बीमारियों के वैक्सीन पर इंग्लैंड में रिसर्च कर रहे हैं, जिनमें से उन्हें अब एक बड़ी कामयाबी मिली है.
वेलकम ट्रस्ट और मेडिकल रिसर्च काउंसिल द्वारा वित्त पोषित किए गए अध्ययन में डॉ मुमताज नैयर ने हेपेटाइटिस सी वायरस के संपर्क में 300 से अधिक मरीजों से डीएनए का विश्लेषण किया जिसमें पता चला कि के आइआर 2 डीएस 2 रिसिप्टर वायरस को सफलतापूर्वक साफ करने के साथ जुड़ा हुआ पाया गया. इन्होंने तब पहचान की कि प्रतिरक्षा प्रणाली ने रिसिप्टर का उपयोग करते हुए एनएस 3 हेलिकेस प्रोटीन को लक्षित किया और पाया कि यह वायरस को बढ़ने से रोकता है.
इन्होंने यह खोज की कि यह एक ही तंत्र कई अलग-अलग वायरसों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. उदाहरण के लिए हेपटाइटिस सी, जीका और डेंगू वायरस,जो कि एनएस 3 हेलिसीज प्रोटीन के भीतर एक क्षेत्र भी है जो कि केआइआर 2 डीएस 2 रिसिप्टर द्वारा मान्यता प्राप्त है. मेडिकल साइंस के क्षेत्र में इसे एक बडी उपलब्धि मानी जा रही है और लोगों के बीच यह उम्मीद जगी है कि भविष्य में इन बीमारियों से बचाव के लिए यह खोज काफी कारगर साबित होगी.
डॉ मुमताज नैयर ने कहा कि हमारी टीम के लिए यह निष्कर्ष बहुत ही रोमांचक है और हमें विश्वास है कि वायरस को वैक्सीन द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि शोध अब भी प्रारंभिक चरण में है और शोध के परीक्षण के लिए पशु अध्ययन और अन्य परीक्षणों की आवश्यकता पड़ेगी.
डॉ मुमताज नेयर ने बताया कि यह खोज इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति है जो रिसेप्टर केआईआर 2 डी 2 की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानती है. चूंकि मैं भारत से आया हूं, जहां हर साल डेंगू के हजारों मामलों सामने आते है इस कारण मैं डेंगू से मरीजों की पीड़ा को समझ सकता हूं. इन डेंगू प्रभावित रोगियों की पीड़ा को कम करने के लिए मुझे अत्यंत खुशी होगी. डॉ मुमताज नैयर ने ही पांच वर्ष पूर्व 10 सितंबर 2012 को भी कालाजार, एचआइवी व कैंसर रोगों पर नियंत्रण हेतु एक बड़ी खोज की थी.
ज्ञात हो कि बिहार के किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर करबलभिट्टा गांव के निवासी डॉ मुमताज नैयर ने उच्च विद्यालय ठाकुरगंज से वर्ष 1994 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी. उच्च शिक्षा पटना के मुस्लिम इंटर कॉलेज में लिया. जिसके बाद डॉ नैयर ने मास्टर ऑफ साइंस जामिया हमदर्द, नई दिल्ली से
किया और बीएससी बायोटेक्नोलॉजी जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली से ही की. नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस पुणे भारत से उन्होंने इम्यूनोलॉजी में पीएचडी की डिग्री हासिल करने के बादवर्तमान में डॉ मुमताज नैयर इंग्लैंड के प्रसिद्ध साउथ थेम्प्टन विश्वविद्यालय में पोस्ट डॉक्टर रिसर्च एसोसिएट हैं.
