किशनगंज : पूर्वोत्तर राज्यों के प्रवेश द्वार किशनगंज, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी, पानीटंकी, इस्लामपुर, पांजीपाड़ा, दालकोला, मालदा मुर्शिदाबाद मादक पदार्थों की तस्करी का ट्रांजिट प्वाइंट बनता जा रहा है. ड्रग्स की खेप कैरियर द्वारा आसानी से गंतव्य तक पहुंचा दिया जाता है. लगभग सात महीने में एसएसबी, रेल पुलिस और किशनगंज पुलिस ने भारी मात्रा में हेरोइन की बरामदगी की है.
खुफिया विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नेपाल व बांग्लादेश के रास्ते नारकोटिक्स ड्रग्स की खेप सिलीगुड़ी से दालकोला तक सक्रिय तस्कर गिरोह तक पहुंचायी जाती है. मादक पदार्थों की रिपै¨कग कर ट्रेनों व उत्तर पूर्व की ओर से आने वाली माल लदे ट्रकों के सहारे बड़े शहरों तक इसकी खेप पहुंचायी जाती है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक सालाना 250 करोड़ का अवैध कारोबार मादक पदार्थों की तस्करी से होता है. तस्कर गिरोह का सिंडिकेट पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी, पानीटंकी,
इस्लामपुर, पांजीपाड़ा एवं बिहार के किशनगंज, पूर्णिया मोड़ व भोजपुर में सक्रिय है. स्थानीय नेटवर्क के सहारे मादक पदार्थों की तस्करी को अंजाम देने का काम किया जाता है. नेपाल से गांजा, अफीम व बांग्लादेश के रास्ते ब्राउन शुगर, हेरोइन की खेप तस्करी के लिए एनएच 31 के किनारे पांजीपाड़ा, इस्लामपुर, दालकोला, मालदा, मुर्शीदाबाद पहुंचाया जाता है. मादक पदार्थों की खेप मालदा के हिल्ली बॉर्डर, उत्तर दिनाजपुर के देवीगंज सीमा से चोरी छुपे पहुंचायी जाती है. तस्कर गिरोह द्वारा प्लास्टिक के छोटे बैग में नारकोटिक्स ड्रग्स की पैकिंग कर पूर्वोत्तर की ओर से आने वाले माल लदे ट्रकों से महानगरों तक भेजा जाता है. कंटेनर में आसानी से छुपा कर इसकी तस्करी की जाती है. यह पूरा खेल कोड वर्ड के सहारे खेला जाता है. इस काले कारोबार में लंबी दूरी तक जाने वाले ट्रक ड्राईवर भी शामिल होते हैं. लंबी दूरी की ट्रेनों से भी मादक पदार्थों की तस्करी की जाती है. तस्करी के सामानों की बरामदगी होने के बाद भी पहचान नहीं हो पाने के कारण अधिकांश मामलों में कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाती है.
