बाढ़ की िवभीषिका . व्यापारियों के खिलाफ बाढ़ पीड़ितों का फूटा गुस्सा, किया सड़क जाम
कालाबाजारी की नीयत से निर्धारित मूल्य से ज्यादा राशि वसूलने का गोरखधंधा शुरू
पौआखाली : इलाके में बाढ़ आपदा के बाद चंद व्यापारी वर्ग पैसों की लालच में खाद्य पदार्थो की कालाबाजारी के नियत से निर्धारित मूल्य से कहीं ज्यादा राशि वसूल करने का गोरखधंधा शुरू कर दिया है. जिस कारण गुस्सायी भीड़ ने गुरुवार की सुबह करीब 10 बजे पौआखाली-डेरामारी मुख्य पथ को पौआखाली पंचायत भवन के पास सड़क जाम कर प्रशासन से कार्रवाई की मांग शुरू कर दी. जिसकी सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष मुकेश कुमार मंडल सअनि अभिलाष सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंचकर आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर जाम को हटवाया. इस दौरान मुखिया प्रतिनिधि लल्लू मुखिया ने भी लोगों को समझाने बुझाने का प्रयास करते हुए प्रशासन से कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की.
जिसके बाद पुलिस ने आलू प्याज के एक मात्र बड़ा खुदरा व्यापारी मंजर आलम के प्रतिष्ठान की जांच पड़ताल कर मौके पर मौजूद एक ट्रक प्याज और दो अन्य जुगाड़ वाहनों में लदे आलू प्याज के बोरों को जब्त करते हुए व्यवसायी मंजर आलम से कई जरूरी पूछताछ कर मामले की जानकारी बीडीओ गनौर पासवान, सीओ मो इस्माईल एवं आपूर्ति पदाधिकारी लोकेश कुमार को दी जिसके चंद घंटे में ही सारे पदाधिकारी पौआखाली पहुंचकर मामले की जानकारी प्राप्त कर व्यवसायी मंजर आलम को कड़ी चेतावनी और बांड लिखवाकर निर्धारित मूल्यों के अंतर्गत खाद्य सामाग्री को बेचने का निर्देश दिया. इस बीच आपूर्ति पदाधिकरी लोकेश कुमार और थानाध्यक्ष मुकेश मंडल ने पौआखाली बाजार का संयुक्त रूप से भ्रमण कर व्यसायियों को हिदायत दी है कि कोई भी आवश्यक वस्तुओं की बिक्री निर्धारित मूल्य के तहत ही करें वरना कानूनी कार्रवाई तय है. उधर इलाके में पेट्रोल पंप में पेट्रोल का स्टॉक खत्म हो जाने से मची कोहराम के बाद बीडीओ सीओ एमओ एसएचओ आदि ने प्रखंड के सभी फ्यूल सेंटरों का निरीक्षण कर वस्तु स्थिति की जानकारी भी ली है. इस बीच लोहागाड़ा, बहादुरगंज और सोंथा आदि जगहों के व्यवसायी लगातार मीरभिट्टा पुल होकर आलू प्याज की खेप को ठेला टेम्पो आदि से ले जा रहे है. जिसकी जांच लगातार पुलिस प्रशासन कर रही है. बड़े पैमाने पर आलू और प्याज का खेप पौआखाली पहुंचने के बाद दिघलबैंक, बहादुरगंज इलाके में आपूर्ति की जा रही है और जिसके दरों में काफी इजाफा से आम आदमी त्रस्त थे. मनमानी कीमतों से आजिज आकर लोगों ने विरोध स्वरूप पौआखाली में सड़क जाम कर दिया था.
ठाकुरगंज : प्रलयंकारी बाढ़ में अपना सबकुछ लुटा देने के बाद इलाके के किसान अपनी जिन्दगी को वापस पटरी पर लाने की कोशिश में लग गये है. अब इलाके के किसानों को थोड़ी बहुत उम्मीद बची है पटसन (जुट) की खेती से होने वाली आय का कि इस जूट की खेती से थोड़ी बहुत आय के बाद वापस वे अपनी जिन्दगी को पटरी पर लाने का प्रयास करेंगे. बाढ़ में अपना सब कुछ गंवा चुके किसानों को सरकार और प्रशाशन की उदासीनता से पीड़ा पहुंची है. वह अब किसान बाजार में अपने फसल का उचित मूल्य पाने के बाद भुलाने का प्रयास भी करेंगे. गुरुवार को अंडाबाड़ी के किसान मंग्लुदीन, आबिद हुसैन, रईसुद्दीन, इसरुद्दीन, मुख्तार आदि ने बताया कि इस बाढ़ में उनकी फसल बड़ी मात्रा में नदी में बह गयी थी . वहीं इस फसल को पानी में डाल कर गलाने की प्रक्रिया के कारण दुराघाटी के मुज्जफ्फर की तो कमर ही टूट गयी है. उसने अपनी तैयार हो चुकी पटसन को गलाने के लिए एक पानी भरे गढ्ढे में रखा था. मेची नदी में आये उफान ने मुजफ्फर की पूरी फसल को बहा दिया. किसानों का कहना है कि अगर अन्य फसलों की तरह सरकार जूट की खेती के लिए भी मदद करे और इसका समर्थन मूल्य बढ़ा दे तो किसानों का हौसला बढ़ेगा और जिन्दगी खुशहाल हो पाएगी.
