परबत्ता : गंगा के जलस्तर में कमी आने के बाद बाढ़ प्रभावित इलाकों में जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है. हालांकि, पानी घटने के बाद भी कई तरह के खतरे बने रहने की आशंका को देखते हुए अंचल अधिकारी ने ग्रामीणों से सतर्कता बरतने की अपील की है. संध्या चौपाल में उन्होंने कहा कि जलस्तर में कमी राहत की बात है, लेकिन इसे खतरे के पूरी तरह टलने का संकेत नहीं माना जा सकता.
उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद कई स्थानों पर जलजमाव, फिसलन, क्षतिग्रस्त सड़क व रास्ते, कमजोर मकान, खुले गड्ढे और कटाव वाले क्षेत्र रह सकते हैं. ऐसे में प्रशासन की ओर से स्थिति का आकलन किये जाने से पहले लोग घर लौटने में जल्दबाजी न करें.
बच्चों को पानी के पास नहीं जाने दें
अंचल अधिकारी ने ग्रामीणों से बच्चों को जलजमाव, गड्ढों, नालों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रखने की अपील की. बाढ़ के पानी में उतरने या तैरने से भी बचने को कहा गया. घर लौटने से पहले मकान की स्थिति की जांच करने तथा विद्युत तार और उपकरणों से सावधानी बरतने की सलाह दी गयी. क्षतिग्रस्त विद्युत व्यवस्था से दूर रहने को कहा गया.
दूषित पानी के सेवन से बचने की अपील
बाढ़ के बाद स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की गयी. ग्रामीणों से संदिग्ध या दूषित पानी का सेवन नहीं करने तथा बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने को कहा गया.
पशुपालकों से पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने और दूषित पानी व असुरक्षित चारे से बचाने की अपील की गयी.
स्थिति पर नजर रख रहा प्रशासन
अंचल अधिकारी ने कहा कि प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रख रहा है. सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और पेयजल समेत आवश्यक सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है. किसी भी आपात स्थिति की सूचना स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा राहत दल को देने की अपील की गयी.
संध्या चौपाल में आपदा मित्र ऋषि कुमार समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे. आपदा मित्रों ने भी ग्रामीणों को बाढ़ के बाद उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों के प्रति जागरूक किया. इस दौरान ग्रामीणों ने स्थानीय समस्याओं से भी प्रशासन को अवगत कराया.
