खगड़िया जिले के बेलदौर प्रखंड स्थित आदर्श मध्य विद्यालय की कक्षा छह से आठ तक को गांधी इंटर विद्यालय में मर्ज करने के शिक्षा विभाग के फैसले पर विवाद गहरा गया है. इस निर्णय के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी विक्रम विरकर को ज्ञापन सौंपकर मर्जर के आदेश को अविलंब रद्द करने की मांग की है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे.
मॉडल स्कूल की पहचान खत्म करने पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि आदर्श मध्य विद्यालय बेलदौर प्रखंड का एक प्रतिष्ठित मॉडल विद्यालय है, जहाँ पठन-पाठन का माहौल बेहतर होने के साथ-साथ सभी आवश्यक बुनियादी और आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं:
- सुविधा संपन्न विद्यालय: ऐसे स्कूल के संचालन में बाधा पहुँचाकर मर्जर करने का फैसला तर्कसंगत नहीं है.
- ग्रामीणों का सवाल: शिक्षा विभाग को उन विद्यालयों की स्थिति सुधारनी चाहिए जहाँ संसाधनों की भारी कमी है, न कि एक बेहतर और उत्कृष्ट विद्यालय की पहचान समाप्त करनी चाहिए.
BEO और मुख्य पार्षद भी कर चुके हैं मर्जर से मुक्त रखने की अनुशंसा
ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों ने भी पहले ही आपत्ति जताई थी:
- ब्लॉक शिक्षा पदाधिकारी (BEO): बीईओ ने पत्रांक-386 (दिनांक 10 सितंबर 2025) के माध्यम से आदर्श मध्य विद्यालय को मर्जर से मुक्त रखने की सिफारिश की थी और इसके बजाय कन्या मध्य विद्यालय को पीएम श्री (PM SHRI) योजना के तहत मर्ज करने का प्रस्ताव दिया था.
- मुख्य पार्षद: बेलदौर नगर पंचायत की मुख्य पार्षद ममता कुमारी ने भी पत्रांक-166 (दिनांक 22 जुलाई 2025) के तहत जिला शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर इस विद्यालय को मर्जर से अलग रखने का लिखित अनुरोध किया था.
इसके बावजूद जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) द्वारा फैसला न बदले जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है.
"बच्चों के भविष्य से न हो खिलवाड़": ग्रामीणों ने दी चेतावनी
वार्ड संख्या 12 के निवासी मोहम्मद कुद्दूस, मोहम्मद इरफान, मोहम्मद जाकिर, नंदलाल शर्मा, देवाचन ताती, जवाहर शर्मा और केशव कुमार सहित अन्य ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए कहा:
ग्रामीणों की मांग: "हमारे पूर्वजों ने इसी विद्यालय से शिक्षा पाई है और यह स्कूल वर्षों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जाना जाता है. जिला शिक्षा पदाधिकारी का यह फैसला बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. अगर जिलाधिकारी विक्रम विरकर जल्द इस मामले में हस्तक्षेप कर मर्जर रद्द नहीं करते, तो पूरा क्षेत्र व्यापक जन आंदोलन करेगा, जिसकी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी."
