चिकित्सकों ने फेस रिकग्निशन तकनीक व एफआरएएस आधारित उपस्थित पर की चर्चा खगड़िया. सदर अस्पताल के सभागार में भासा व आयुष एवं दंत चिकित्सा पदाधिकारियों की बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. रमेंद्र कुमार ने किया. बैठक में भाग ले रहे विशिष्ट चिकित्सा पदाधिकारी, सामान्य चिकित्सा पदाधिकारी, दंत चिकित्सा पदाधिकारी, आयुष फिजिशियन, आयुष चिकित्सा पदाधिकारी ने कहा कि चिकित्सा पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति बिना विभागीय अनुमति के नियम के विरुद्ध छह महीने के लिए विस्तारित कर दी गयी. इससे चिकित्सा पदाधिकारियों में रोष व्याप्त है. यदि इसे वापस नही लिया गया तो चिकित्सक आंदोलन करने के लिए बाध्य हो जायेंगे. बैठक में भाग ले रहे चिकित्सकों ने कहा कि वे लोग 24 × 7 ड्यूटी के लिए तैनात रहते हैं. ओपीडी, इंमरजेंसी, कोर्ट गवाही, पोस्टमार्टम, नेशनल प्रोग्राम के साथ अन्य कई कार्य करना पड़ता है. उसे आउट ऑफ रिच एरिया में भी कार्य करना पड़ता है. ऐसे स्थिति में इस तरह के जियो टैग से उपस्थिति बनाना असंभव है. न्याय संगत भी नहीं है. पूर्व में ही एफआरएएस सिस्टम को शिथिल किया गया था. इसलिए खगड़िया भाषा सिविल सर्जन से यह मांग करती है कि जियो टैग आधारित फोटो वाले लेटर को को शिथिल किया जाय. ट्रेजरी ट्रेनिंग करने के बाद भी चिकित्सकों को ट्रेजरी ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है. जो निंदनीय है. भासा जिला पदाधिकारी से मांग करती है कि चिकित्सकों को जल्द से जल्द सर्टिफिकेट मुहैया करवाया जाय. बैठक में भाग ले रहे चिकित्सकों ने कहा कि नियमित चिकित्सा पदाधिकारियों की उपस्थिति का मॉनिटरिंग सिविल सर्जन द्वारा नामित चिकित्सा पदाधिकारियों से कराया जाय. ना कि एनएचएम या डीएचएस द्वारा कराया जाय. उल्लेखनीय है कि विभाग द्वारा फेस रिकग्निशन (चेहरा पहचान) तकनीक से उपस्थिति बनाने का आदेश दिया गया. जहां यह सुविधा नहीं है. वहां चिकित्सा पदाधिकारी एफआरएएस आधारित उपस्थित बनाएंगे. जिसका चिकित्सकों ने विरोध किया है. बैठक में भासा के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार, सचिव डॉ. नरेंद्र कुमार, राज्यस्तरीय अवर महासचिव अभिषेक आनंद, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एन एल दास, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. ऋचा, डॉ. शोभा रानी, प्रवक्ता डॉ. हरि नंदन शर्मा, डॉ. चंद्र प्रकाश, डॉ. अमित, डॉ विनय, डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. विश्वजीत, डॉ. हरिनंदन पासवान, डॉ मो. रागिव आदि ने भाग लिया.
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