खगड़िया जिले के बेलदौर प्रखंड अंतर्गत सार्वजनिक चौराहों पर आम यात्रियों की सहूलियत के लिए बिहार सरकार द्वारा लाखों रुपये की लागत से निर्मित कराए गए यात्री शेड बदहाली और घोर अतिक्रमण का शिकार हो चुके हैं. जिन यात्री शेडों का निर्माण राहगीरों, महिलाओं और बुजुर्गों को चिलचिलाती धूप व बारिश से राहत देने के लिए कराया गया था, वे आज प्रशासनिक उपेक्षा के चलते दबंगों और स्थानीय लोगों के निजी उपयोग का अड्डा बनकर रह गए हैं. सरकारी योजनाओं के इस तरह दुरुपयोग होने से स्थानीय ग्रामीणों और यात्रियों में गहरा रोष है.
उसराहा चौक: निर्माण के बाद से यात्री सुविधा से वंचित
बीपी मंडल सेतु (पुल) से सटे उसराहा चौक पर स्थित यात्री शेड प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण बना हुआ है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इस शेड के निर्माण के बाद से आज तक आम मुसाफिर इसका समुचित लाभ नहीं ले पाए हैं. शेड के अंदर और बाहरी परिसर पर पूरी तरह से अवैध कब्जा जमा लिया गया है. राहगीरों का आरोप है कि यदि कोई यात्री वहां बैठने का प्रयास करता है या अतिक्रमण हटाने की बात करता है, तो कब्जाधारी दबंग मारपीट और गाली-गलौज पर उतारू हो जाते हैं. नतीजतन, लाखों रुपये का यह शेड केवल एक अनुपयोगी ढांचा बनकर खड़ा है.
जीरो माइल कला भवन के पास भी वही हाल
उसराहा चौक के अलावा बेलदौर जीरो माइल चौक पर कला भवन के समीप बने सरकारी यात्री शेड की स्थिति भी बेहद दयनीय है. यहां भी सार्वजनिक सुविधा को निजी संपत्ति की तरह घेर लिया गया है. दूर-दराज से वाहन पकड़ने आने वाले यात्रियों को सड़क किनारे धूप और बरसात में खड़े रहकर गाड़ियों का इंतजार करना पड़ता है, जबकि उनके लिए बना शेड अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है. स्थानीय बुद्धिजीवियों ने सवाल उठाया है कि जब सरकारी राशि से बनी सुविधाओं का लाभ जनता को नहीं मिल सकता, तो ऐसे निर्माणों का क्या औचित्य रह जाता है.
टैक्स के पैसे की बर्बादी, डीएम व सीओ से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार आम जनता के टैक्स के पैसों से ऐसी जनसुविधाओं का निर्माण कराती है, लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र फेल होने से योजनाएं भू-माफियाओं और दबंगों की भेंट चढ़ जाती हैं. स्थानीय नागरिकों ने खगड़िया के जिलाधिकारी (DM) और बेलदौर के अंचलाधिकारी (CO) से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है. ग्रामीणों ने मांग की है कि:
- उसराहा चौक और जीरो माइल स्थित दोनों यात्री शेडों की मापी कराकर अविलंब अतिक्रमणमुक्त कराया जाए.
- सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने और यात्रियों को धमकाने वालों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जाए.
- भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए नियमित पुलिस गश्त सुनिश्चित की जाए.
