खगड़िया. नशे की लत से मुक्ति दिलाने के नाम पर जिले में कई नशा मुक्ति केंद्र संचालित होने की बात सामने आ रही है. शहर के बलुआही, रहीमपुर, मथुरापुर के अलावा बेलदौर, परबत्ता और अन्य क्षेत्रों में ऐसे केंद्र चलने की जानकारी है. लेकिन इन केंद्रों के संचालन, पंजीकरण, चिकित्सकीय व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. सिविल सर्जन के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के पास जिले में एक भी नशा मुक्ति केंद्र का पंजीकरण नहीं है.
पंजीकरण नहीं, फिर किसकी अनुमति से चल रहे केंद्र
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में एक भी नशा मुक्ति केंद्र पंजीकृत नहीं है, तो विभिन्न इलाकों में संचालित केंद्र किस अनुमति के आधार पर मरीजों को भर्ती कर रहे हैं. क्या इन केंद्रों का विभागीय स्तर पर कभी निरीक्षण हुआ है और यदि हुआ है तो जांच में क्या स्थिति सामने आयी, यह भी स्पष्ट नहीं है.
नशा मुक्ति केंद्रों का उद्देश्य शराब, नशीली दवाओं और अन्य मादक पदार्थों की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार, काउंसलिंग और पुनर्वास के जरिए सामान्य जीवन में वापस लाना है. ऐसे में इनके संचालन में स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है.
मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ केंद्र सामान्य भवनों में ही संचालित हो रहे हैं, जहां मरीजों को भर्ती कर नशा छुड़ाने का दावा किया जाता है. आरोप है कि कई केंद्रों में फायर सेफ्टी, पर्याप्त हवादार कमरे, डिग्रीधारी चिकित्सक और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों जैसी जरूरी व्यवस्थाएं नहीं हैं.
यदि किसी केंद्र में मरीजों को भर्ती रखा जा रहा है तो आग या अन्य आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था होना जरूरी है. इसके अलावा मरीजों की नियमित स्वास्थ्य जांच, दवा और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए योग्य चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है.
हर महीने 15 हजार रुपये लेने का आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों के परिजनों से प्रतिमाह करीब 15 हजार रुपये तक लिये जाते हैं. कुछ केंद्रों द्वारा तीन महीने में नशा छुड़ाने का दावा किये जाने की बात भी सामने आ रही है.
हालांकि इन दावों की वास्तविकता और केंद्रों द्वारा ली जाने वाली राशि की वैधता की जांच जरूरी है. मरीजों से ली जाने वाली फीस, उपलब्ध सुविधाओं और उपचार की पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आना चाहिए.
मरीज से मारपीट के बाद मौत का मामला भी उठा
नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाये जा रहे हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार करीब छह माह पहले एक केंद्र में मरीज के साथ मारपीट की घटना हुई थी, जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी थी. इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए केंद्र संचालक को गिरफ्तार किया था.
इस घटना के मद्देनजर अब जिले में संचालित अन्य नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली और वहां भर्ती मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की मांग उठ रही है.
बिना डॉक्टर कैसे हो रहा मरीजों का इलाज
लंबे समय से शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले व्यक्ति को अचानक नशा बंद कराने पर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत पड़ सकती है.
ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि जिन केंद्रों में योग्य चिकित्सक और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की व्यवस्था नहीं होने का आरोप है, वहां मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कौन करता है. दवा कौन देता है, आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाने की क्या व्यवस्था है और इलाज का रिकॉर्ड कैसे रखा जाता है, इन बिंदुओं की भी जांच जरूरी है.
जांच में किन बिंदुओं की होनी चाहिए पड़ताल
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से जिले के सभी नशा मुक्ति केंद्रों की जांच कराये. जांच के दौरान केंद्रों के पंजीकरण, भवन की स्थिति, फायर सेफ्टी, चिकित्सकों की डिग्री एवं पंजीकरण, प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता, भर्ती मरीजों की संख्या, दवाओं की व्यवस्था और मरीजों से ली जाने वाली राशि का रिकॉर्ड खंगाला जाना चाहिए.
ऐसी जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन से केंद्र नियमों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं और कहां अनियमितताएं हैं.
सिविल सर्जन बोले, रजिस्ट्रेशन नहीं है
सिविल सर्जन डॉ. रामेन्द्र कुमार ने बताया कि जिले में एक भी नशा मुक्ति केंद्र का रजिस्ट्रेशन नहीं है. उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी.
कार्रवाई के लिए शिकायत का इंतजार क्यों
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में किसी नशा मुक्ति केंद्र का पंजीकरण नहीं है, जबकि विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे केंद्र संचालित होने की जानकारी सामने आ रही है. ऐसे में सवाल यह है कि इन केंद्रों के संचालन की निगरानी किस स्तर पर हो रही है. नशे की लत से परेशान मरीज और उनके परिजन इलाज की उम्मीद में इन केंद्रों तक पहुंचते हैं. इसलिए नशा मुक्ति के नाम पर चल रहे केंद्रों की वैधता, चिकित्सकीय व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा की जांच केवल शिकायत मिलने के बाद ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी कराये जाने की जरूरत है.
