खगड़िया. मोरकाही थाना क्षेत्र के रसौंक पंचायत निवासी चौकीदार मो. सकीम साह पिछले 14 वर्षों से नियमितीकरण की उम्मीद में सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं. पूर्व मंत्री, सांसद, विधायक से लेकर डीएम, एसपी, सीओ और अन्य अधिकारियों के समक्ष अपनी फरियाद रख चुके सकीम अब आर्थिक मजबूरी में निजी कंपनी में गार्ड की नौकरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं. उनका दावा है कि उनके पक्ष में तत्कालीन डीजीपी, सांसद, विधायक, डीएम, एसपी, सीओ समेत विभिन्न अधिकारियों की करीब 22 अनुशंसा पत्र हैं. इसके बावजूद उन्हें अब तक नियमित चौकीदार का दर्जा नहीं मिल पाया है.
जिला सामान्य शाखा ने सदर सीओ को भेजा पत्र
सकीम साह की ओर से दिए गए आवेदन में उन्हें अस्थायी रूप से चौकीदार के पद पर कार्य करने की बात कही गयी है. नियमितीकरण की मांग को लेकर उन्होंने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप का अनुरोध किया है. बताया गया है कि जिला सामान्य शाखा की ओर से सदर सीओ को पत्र भेजकर मो. सकीम साह को चौकीदार के पद पर नियमित करने की बात कही गयी है. सकीम का कहना है कि बेहतर कार्य के लिए तत्कालीन एसपी ने उन्हें सम्मानित भी किया था. उन्होंने चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के चर्चित अपहरण कांड के उद्भेदन में बेहतर कार्य करने का भी दावा किया है.
डीईओ कार्यालय में रात्रि प्रहरी के रूप में थे तैनात
मो. सकीम साह ने बताया कि वर्ष 2011-12 में वे तत्कालीन डीईओ कार्यालय में रात्रि प्रहरी के रूप में तैनात थे. उनके अनुसार उस दौरान पेट्रोल पंप से डीजल लाने में कथित गड़बड़ी का उन्होंने विरोध किया था. उनका आरोप है कि विरोध करने के बाद उनका एक वर्ष का वेतन रोक दिया गया.
सकीम ने तत्कालीन डीईओ पर उनके साथ मारपीट करने और इसके बाद चौकीदारी के काम से हटाने का भी आरोप लगाया है. उनका कहना है कि उस समय से अब तक उन्हें दोबारा चौकीदारी के काम पर तैनात नहीं किया गया.
वेतन के लिए डीएम कार्यालय के सामने दिया धरना
सकीम ने बताया कि वेतन नहीं मिलने के विरोध में उन्होंने डीएम कार्यालय के समक्ष धरना भी दिया था. उनके अनुसार तत्कालीन डीएम की ओर से समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी न तो बकाया वेतन मिला और न ही उन्हें दोबारा चौकीदार के पद पर नियमित किया गया. उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर वर्षों से अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है.
14 वर्षों में बदल गये अधिकारी, नहीं बदली परेशानी
सकीम के अनुसार पिछले 14 वर्षों में उनकी नौकरी और नियमितीकरण के लिए संघर्ष जारी है. इस दौरान जिले से लेकर पटना तक कई अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों का उन्होंने चक्कर लगाया. कई डीएम, एसपी, सीओ और अन्य अधिकारी बदल गये, लेकिन उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है. उन्होंने बताया कि पूर्व मंत्री, सांसद और विधायक से भी समस्या के समाधान की गुहार लगायी गयी. उनके पक्ष में करीब 22 अनुशंसा पत्र जारी होने का दावा भी उन्होंने किया है. इसके बावजूद नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी.
नौकरी के लिए जमीन बेचने की आयी नौबत
सकीम ने बताया कि नौकरी पाने और अपने अधिकार के लिए वर्षों तक संघर्ष करने के दौरान उनकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती गयी. परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्हें खेती की जमीन तक बेचनी पड़ी. अब उनके पास सिर्फ रहने भर की जमीन बची है. उन्होंने बताया कि उनके परिवार में छह बेटियां और चार बेटे हैं. इतने बड़े परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है. उनके अनुसार पिछले 14 वर्षों से परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है और कई बार खाने-पीने तक की परेशानी सामने आती है.
मजबूरी में निजी कंपनी में कर रहे गार्ड की नौकरी
सरकारी सेवा में नियमितीकरण नहीं होने के कारण सकीम फिलहाल निजी कंपनी में गार्ड की नौकरी कर रहे हैं. उनका कहना है कि परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह काम करना उनकी मजबूरी है. वर्षों तक सरकारी व्यवस्था से जुड़े रहने के बाद भी अपने अधिकार के लिए संघर्ष करना उनके लिए पीड़ादायक स्थिति है.
30 जून को सदर सीओ को मिला नियमितीकरण का पत्र, फिर भी इंतजार
सकीम ने बताया कि 30 जून 2026 को सदर सीओ को उन्हें नियमित करने संबंधी पत्र प्राप्त हुआ था. इसके बावजूद अब तक मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का उन्होंने आरोप लगाया है. उनका कहना है कि संबंधित कार्यालयों में लगातार संपर्क करने के बाद भी उन्हें सिर्फ इंतजार करना पड़ रहा है.
प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग
मो. सकीम साह ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, वर्षों से लंबित प्रकरण का उचित समाधान करने और उन्हें चौकीदार के पद पर नियमित करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि यदि उनके पक्ष में जारी अनुशंसा पत्रों और प्रशासनिक पत्राचार के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिलता है तो यह उनके लिए बेहद निराशाजनक होगा. अब उनकी नजर जिला प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर है.
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