बारिश की एक रात और मलबे में बदल गया 1948 का इतिहास, 1100 बच्चों वाले स्कूल की कहानी

खगड़िया के परबत्ता में 1948 में बना जगन्नाथ राम हाई स्कूल की पुरानी इमारत बारिश में ढह गई. गनीमत रही कि भवन परित्यक्त घोषित था, पर 1100 बच्चों के लिए सिर्फ 8 कमरे चिंता बढ़ा रहे हैं. जर्जर भवनों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं.

Jagannath Ram High School Building Collapse: परबत्ता (खगड़िया) के करीब आठ दशक तक इतिहास का गवाह रहा एक स्कूल भवन शुक्रवार रात हुई बारिश के बीच अचानक भरभराकर गिर गया. परबत्ता प्रखंड के सलारपुर स्थित जगन्नाथ राम उच्च विद्यालय की वर्ष 1948 में बनी पुरानी इमारत का एक बड़ा हिस्सा देखते ही देखते मलबे में बदल गया. भवन की तीन कोठरियां पूरी तरह जमींदोज हो गयीं.

राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि जिस हिस्से में हादसा हुआ, वह पहले से ही परित्यक्त घोषित था. वहां किसी तरह की शैक्षणिक गतिविधि संचालित नहीं हो रही थी. इस वजह से हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.

लेकिन यह घटना स्कूल परिसर में मौजूद दूसरे पुराने भवनों को लेकर सवाल जरूर खड़े करती है. विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, परिसर में कई अन्य भवन भी जर्जर स्थिति में हैं. ऐसे में बारिश के मौसम में इनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गयी है.

1948 में बना था भवन, दो साल पहले ही घोषित हुआ था परित्यक्त

जगन्नाथ राम उच्च विद्यालय की पुरानी इमारत का निर्माण वर्ष 1948 में हुआ था. यानी यह भवन करीब 78 वर्ष पुराना था. लंबे समय से इसकी हालत खराब थी और भवन जर्जर अवस्था में पड़ा था.

विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, विभाग ने करीब दो वर्ष पहले ही इस पुराने भवन को परित्यक्त घोषित कर दिया था. इसके बाद वहां किसी भी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधि संचालित करने पर रोक थी.

प्रधानाध्यापक नवीन कुमार ने बताया कि भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी विभाग को पहले ही दी जा चुकी थी. भवन की तस्वीरें भी विभाग को भेजी गयी थीं. इसके बावजूद शुक्रवार रात बारिश के बाद भवन का एक बड़ा हिस्सा अचानक ढह गया.

रात की बारिश ने कमजोर इमारत को कर दिया धराशायी

शुक्रवार रात हुई बारिश के बाद पुरानी इमारत की तीन कोठरियां भरभराकर गिर गयीं. जर्जर भवन के अचानक गिरने से परिसर में मलबा फैल गया.

पुरानी इमारत पहले से ही कमजोर थी. बारिश के बाद इसकी संरचना और कमजोर होने की आशंका जतायी जा रही है. हालांकि राहत की बात यह रही कि भवन खाली था और वहां बच्चों की पढ़ाई नहीं होती थी.

अगर यही हादसा किसी संचालित कक्षा के दौरान होता, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी. यही वजह है कि स्कूल परिसर में बचे दूसरे जर्जर भवनों की स्थिति की जांच अब महत्वपूर्ण हो गयी है.

1100 बच्चों के लिए सिर्फ आठ कमरे, पहले से है जगह की कमी

जगन्नाथ राम उच्च विद्यालय में वर्तमान में करीब 1100 विद्यार्थियों का नामांकन है. इसके मुकाबले विद्यालय में सिर्फ आठ कमरे उपलब्ध हैं.

इन आठ कमरों में केवल विद्यार्थियों की कक्षाएं ही नहीं चलतीं, बल्कि कार्यालय, प्रयोगशाला और स्कूल की दूसरी जरूरी गतिविधियां भी संचालित होती हैं. ऐसे में विद्यार्थियों की संख्या और उपलब्ध कमरों के बीच बड़ा अंतर नजर आता है.

पुराने भवन के गिरने के बाद विद्यालय के सामने जगह और भवन से जुड़ी चुनौती और बढ़ गयी है. स्कूल प्रबंधन को अब अतिरिक्त कक्षाओं की जरूरत पहले से अधिक महसूस हो रही है.

एक भवन गिरा, लेकिन सवाल दूसरे जर्जर भवनों पर

विद्यालय परिसर में केवल वही पुराना भवन जर्जर नहीं था जो शुक्रवार रात गिरा. स्कूल प्रबंधन के अनुसार, परिसर में मौजूद अन्य पुराने भवन भी खराब स्थिति में हैं.

बारिश का मौसम अभी जारी है. ऐसे में इन भवनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. खासकर उस विद्यालय में जहां करीब 1100 विद्यार्थी रोजाना आते हैं, जर्जर संरचनाओं की समय पर जांच और सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हो जाता है.

स्कूल परिसर में बच्चों की आवाजाही के दौरान किसी कमजोर भवन या हिस्से के आसपास खतरा न रहे, इसके लिए संबंधित विभाग को सुरक्षा जांच कर आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है.

स्कूल को चाहिए नए कमरे, बच्चों की पढ़ाई पर भी असर का खतरा

पुराने भवन के गिरने से तत्काल कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन विद्यालय की बुनियादी जरूरतों का सवाल और गंभीर हो गया है.

1100 विद्यार्थियों के लिए महज आठ कमरों में पढ़ाई और दूसरी गतिविधियां संचालित करना पहले से चुनौतीपूर्ण है. ऐसे में अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण विद्यालय की प्रमुख जरूरतों में शामिल हो सकता है.

विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि अब परिसर में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के साथ-साथ बचे हुए जर्जर भवनों की सुरक्षा जांच भी जरूरी है.

Jagannath Ram High School Building Collapse: अब आगे की कार्रवाई पर नजर

सबसे अहम सवाल यह है कि जब भवन को करीब दो वर्ष पहले ही परित्यक्त घोषित कर दिया गया था और उसकी जर्जर स्थिति की तस्वीरें भी विभाग को भेजी गयी थीं, तो अब परिसर में मौजूद अन्य पुराने भवनों की स्थिति की जांच कब होगी.

इस घटना ने फिलहाल किसी की जान नहीं ली, लेकिन यह स्कूल भवनों की नियमित सुरक्षा जांच और रखरखाव की जरूरत की ओर जरूर इशारा करती है.

अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग गिर चुके भवन के मलबे और परिसर में मौजूद अन्य जर्जर संरचनाओं को लेकर क्या कदम उठाता है. साथ ही 1100 विद्यार्थियों की जरूरत को देखते हुए अतिरिक्त कमरों के निर्माण की दिशा में कार्रवाई कितनी जल्दी शुरू होती है.

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लेखक के बारे में

By पलटू झा

पलटू झा प्रिंट माध्यम में 11 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. परबत्ता (खगड़िया) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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