ईरान-इजरायल में छिड़ा युद्ध, लेकिन गोगरी में रोज रसोई गैस के लिए 'जंग' लड़ रहे उपभोक्ता, होम डिलीवरी नियम हवा

वैश्विक स्तर पर युद्ध भले ही ईरान और इजरायल के बीच चल रहा हो, लेकिन खगड़िया जिले के गोगरी अनुमंडल में आम उपभोक्ता हर रोज अपने पेट की आग बुझाने के लिए रसोई गैस सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी कतारों में 'जंग' लड़ रहे हैं. प्रशासनिक उदासीनता के कारण गैस एजेंसियों पर उमड़ी भारी भीड़ सरकारी दावों की पोल खोल रही है.

बेलदौर (खगड़िया) से अमित सिंह की रिपोर्ट:

चिलचिलाती धूप और उमस के बीच घंटों कतार में खड़े रहने की मजबूरी

यह पूरा नजारा बुधवार की सुबह करीब 10:30 बजे गोगरी स्थित दीप गंगा गैस एजेंसी कार्यालय के बाहर देखने को मिला. जहाँ कड़ाके की धूप और भीषण उमस के बीच सैकड़ों उपभोक्ता हाथों में खाली गैस सिलेंडर थामे अपनी बारी का इंतजार करते दिखे. उपभोक्ताओं ने बताया कि मोबाइल पर ओटीपी (OTP) या डीएसी (DAC) कोड का मैसेज मिलने के बाद वे डिलीवरी पर्ची कटवाने के लिए घंटों लाइन में लगकर पसीना बहाते हैं. इसके बाद जब बड़ी मशक्कत से पर्ची मिल जाती है, तो फिर ऑफिस के समीप खड़ी गाड़ी से गैस सिलेंडर लेने के लिए दोबारा लंबी कतार में खड़ा होना पड़ता है. तब जाकर कहीं उन्हें गैस नसीब होती है.

एजेंसी के बोर्ड पर लिखा है ‘पूर्णतः होम डिलीवरी’, पर धरातल पर नियम ध्वस्त

इस पूरे मामले का सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि दीप गंगा गैस एजेंसी कार्यालय के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा हुआ है— “प्रशासन के आदेशानुसार गैस सिलेंडर ऑफिस या गोदाम से नहीं दिया जाएगा, गैस की पूर्णतः होम डिलीवरी होगी.” लेकिन इन दावों और सरकारी आदेशों की धज्जियां खुद अनुमंडल मुख्यालय गोगरी में सरेआम उड़ रही हैं. जब अनुमंडल स्तर पर ही होम डिलीवरी का यह हाल है, तो प्रखंड और इसके सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी गैस आपूर्ति की बदहाल स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.

डेढ़ महीने की समय शर्त और बुकिंग के चक्रव्यूह से जनता त्रस्त

गैस लेने आए नाराज उपभोक्ताओं ने एजेंसी प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया. उन्होंने बताया कि इन दिनों गैस आपूर्ति की इस बदइंतजामी ने आम लोगों के दैनिक जीवन में एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. पहले तो डेढ़ महीने (45 दिन) की समय सीमा की शर्त, उसके बाद ऑनलाइन बुकिंग के लिए डीएसी मैसेज का लंबा इंतजार और फिर गैस लेने के लिए इस उमस भरी गर्मी में घंटों की यह ‘जंग’ किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. इसके बावजूद स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी और गैस एजेंसी के जिम्मेदार लोग आम जनता की इस सुध लेने से पूरी तरह बेखबर बने हुए हैं.

सिलेंडर पाकर मिलती है जंग जीतने जैसी खुशी

स्थानीय लोगों का कहना है कि तमाम मुश्किलों और अपमानजनक कतारों से गुजरने के बाद जब चिलचिलाती धूप में गैस सिलेंडर हाथ में आता है, तो उपभोक्ताओं को ऐसा लगता है जैसे उन्होंने कोई बड़ी जंग जीत ली हो. पसीने से तर-बतर होकर किसी तरह सिलेंडर घर पहुंचता है, तब जाकर परिवारों में सुबह की चाय और दो वक्त की रोटी नसीब हो पाती है. उपभोक्ताओं ने खगड़िया जिला प्रशासन और गोगरी अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) से मांग की है कि गैस सिलेंडरों की होम डिलीवरी व्यवस्था को कड़ाई से लागू कराया जाए ताकि आम नागरिकों को इस नारकीय कतार और ब्लैक मार्केटिंग से राहत मिल सके.

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Published by: Divyanshu Prashant

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