खगड़िया से राजकिशोर की रिपोर्ट
Flood Alert: खगड़िया में संभावित बाढ़ को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं. जिले के 48 बाढ़ प्रभावित पंचायतों पर विशेष नजर रखी जा रही है. मंगलवार को जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने सभी विभागों के साथ समीक्षा बैठक कर राहत शिविर, सामुदायिक रसोई, नाव, दवाएं और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. प्रशासन का लक्ष्य है कि आपदा की स्थिति में लोगों को तत्काल राहत और सुरक्षित आश्रय मिल सके.
48 पंचायतों पर बाढ़ का खतरा, प्रशासन हाई अलर्ट पर
समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में डीएम विक्रम विरकर ने बताया कि जिले के सात अंचलों की करीब 48 पंचायतें हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित होती हैं. बागमती, कोसी और बूढ़ी गंडक नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की प्रवृत्ति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. सभी तटबंधों की प्रतिदिन निगरानी की जा रही है और उनकी स्थिति का नियमित खैरियत प्रतिवेदन लिया जा रहा है.
56 राहत शिविर और 139 सामुदायिक रसोई की तैयारी
संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जिले में 56 मानव बाढ़ राहत शिविर और 139 सामुदायिक रसोई पहले से चिह्नित कर ली गई हैं. डीएम ने निर्देश दिया कि सभी राहत शिविरों में पेयजल, शौचालय, बिजली, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाएं पहले से उपलब्ध रहें. साथ ही सूखा राशन, खाद्यान्न, पशुचारा, नाव, मशीनरी और अन्य राहत सामग्री का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जाए.
गर्भवती महिलाओं और संवेदनशील लोगों पर विशेष फोकस
प्रशासन ने बाढ़ के दौरान प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए 1,651 गर्भवती महिलाओं और 1,537 धात्री महिलाओं की पहचान की है. इसके अलावा वृद्धजन, दिव्यांग, गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों और अन्य संवेदनशील नागरिकों की सूची भी तैयार की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके.
मानव और पशुओं के इलाज की भी पूरी व्यवस्था
बैठक में बताया गया कि जिले के सभी प्रखंडों में पशुओं के उपचार के लिए 44 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं. मानव स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी आवश्यक दवाएं, मेडिकल टीम और स्वास्थ्य संस्थानों को तैयार रखा गया है. डीएम ने निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी स्थिति में चिकित्सा सेवाएं बाधित नहीं होनी चाहिए.
अर्ली वार्निंग सिस्टम और समन्वय पर जोर
डीएम ने अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत रखने के निर्देश देते हुए कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जीविका दीदियों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं और पंचायत स्तर के कर्मियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा जाए. उन्होंने बीडीओ और सीओ को नावों की उपलब्धता, ऊंचे स्थानों, राहत शिविरों, पेयजल, बिजली, संचार और स्वच्छता व्यवस्था का समय पर भौतिक सत्यापन करने का निर्देश दिया.
जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने कहा कि संभावित बाढ़ के दौरान जन-धन की क्षति को न्यूनतम रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसके लिए सभी विभागों को पूरी सतर्कता, आपसी समन्वय और समयबद्ध तैयारी के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया है.
