खगड़िया : रेलवे स्टेशन की साफ-सफाई में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ने वाले सफाईकर्मी को पेट भरना भी मुश्किल हो रहा है. कारण, आउटसोर्सिंग एजेंसी के तहत काम करने वाले इन सफाईकर्मियों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दिया जा रहा है. सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी 230 रुपये निर्धारित किये जाने के बावजूद सफाईकर्मियों को 150 प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जा रही है. कई सफाईकर्मियों ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि मजदूरी बढ़ाने के लिए कहने पर आउटसोर्सिंग एजेंसी द्वारा काम से हटाने की धमकी दी जाती है.
कई सफाईकर्मी को तो हक की आवाज उठाने पर काम से हाथ धोना पड़ा है. लिहाजा, मजबूरी में न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलने के बावजूद सफाईकर्मी काम करने को विवश हैं, लेकिन रेलवे विभाग को मजदूरों की मजबूरी से कोई लेना देना नहीं है.
सफाईकर्मियों में पनप रहा आक्रोश : कम मजदूरी व संसाधन के अभाव के बीच साफ-सफाई में लगे सफाईकर्मियों में असंतोष पनप रहा है. आउटसोर्सिंग के माध्यम से रेलवे स्टेशन की साफ-सफाई का काम किया जा रहा है. जिसमें 60 सफाईकर्मी तीन शिफ्ट में 24 घंटा काम करवाना है, लेकिन संवेदक द्वारा 30 से 40 सफाई कर्मी से ही कार्य करवाया जा रहा है. एकरारनामा के अनुसार प्रत्येक सफाई कर्मी महिला व पुरुष को बुट, ग्लब्स, माउस, ड्रेस आदि भी देना है. सफाई कार्य में दिन में दो बार पानी व फिनाइल से पोंछा लगाना अनिवार्य किया गया है.
पानी के अभाव में धुलाई का काम नहीं हो पा रहा है. संवेदक द्वारा दो चार सफाई कर्मी को छोड़ अन्य सफाईकर्मी को बुट, ग्लोब्स, माड्स, तथा ड्रेस उपलब्ध नहीं कराया गया है. बीते तीन माह पूर्व भारत सरकार द्वारा स्वच्छता अभियान के अवसर पर सोनपुर के मंडल रेल प्रबंधक मनोज कुमार अग्रवाल ने सभी सफाईकर्मी को बुलाकर जानकारी ली थी, लेकिन फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है. डीआरएम ने सफाईकर्मी को संसाधनों से लैस कर निर्धारित संख्या सुनिश्चित करने का आदेश आउटसोर्सिंग एजेंसी को दिया था, लेकिन मंडल रेल प्रबंधक के जाते ही आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है.
कहते हैं एसएस
एसएस प्रवीण कुमार ने कहा कि ऐसी िशकायत नहीं मिली है. शिकायत मि लने पर जांच की जायेगी. दोषियों पर कार्रवाई की जायेगी.
