खाता संचालन पर लगायी रोक

धांधली. कर्मियों के वेतन पर फूंक डाले 37 लाख आर्य कन्या उच्च विद्यालय में बहाली से लेकर वेतन भुगतान तक में हेराफेरी का मामला सामने आने लगा है. स्कूल में विभिन्न पदों पर हुई बहाली में हेराफेरी के खुलासे के बाद अब वेतन भुगतान में गड़बड़ी का पर्दाफाश हुआ है. खगड़िया : यहां दाल में […]

धांधली. कर्मियों के वेतन पर फूंक डाले 37 लाख

आर्य कन्या उच्च विद्यालय में बहाली से लेकर वेतन भुगतान तक में हेराफेरी का मामला सामने आने लगा है. स्कूल में विभिन्न पदों पर हुई बहाली में हेराफेरी के खुलासे के बाद अब वेतन भुगतान में गड़बड़ी का पर्दाफाश हुआ है.
खगड़िया : यहां दाल में काला नहीं पूरी दाल ही काली नजर आ रही है. मामला आर्य कन्या उच्च विद्यालय में विभिन्न पदों पर हुई बहाली से लेकर इन कर्मियों को वेतन भुगतान तक से जुड़ा हुआ है. इधर, धांधली के खुलासा बाद डीएम जय सिंह ने विद्यालय के बैंक खाता संचालन पर रोक लगाने का निर्देश डीइओ को दिया है. डीएम के कड़े रुख को देखते हुए पिछले दरवाजे से बहाल होने वाले शिक्षक से लेकर चपरासी तक में हड़कंप मचा हुआ है.
इधर, उच्च न्यायालय के आदेश पर आर्य कन्या उच्च विद्यालय के नवनिर्वाचित सचिव को प्रभार देने में आनाकानी कर रहे विद्यालय के प्रधानाध्यापक नंदलाल साह की मुश्किलें बढ़ने की आशंका जतायी जा रही है. इधर, विद्यालय से जुड़े मामलों में डीपीओ (शिक्षा) स्थापना शाखा से निर्गत पत्रांक 3361 की दो चिठ्ठी खोल रहे धांधली के पोल खोलने के लिये काफी है.
डीइओ के दो पत्र से उठ रहे सवाल
पूरे प्रकरण में पांच दिनों के अंतराल में डीइओ कार्यालय से निर्गत पत्र से कई सवाल उठ खड़े हो गये हैं. छह मई 2015 को डीइओ डॉ ब्रज किशोर सिंह द्वारा आर्य कन्या उच्च विद्यालय के सचिव/प्रभारी प्रधानाध्यापक को पत्र भेजा गया. जिसमें साफ-साफ कहा गया है कि विद्यालय प्रबंध समिति द्वारा विभिन्न पदों पर बहाली की सूचना प्राप्त हो रही है.
लेकिन कार्यालय को अब तक इसकी कोई सूचना नहीं है. विद्यालय में नियोजन संबंधी शिक्षक व अन्य कर्मियों की सूची डीइओ कार्यालय को उपलब्ध करवाया जाये. इसके ठीक पांच दिन बाद 11 मई 2015 को डीइओ डॉ सिंह ने डीपीओ स्थापना कार्यालय से निर्गत पत्र का हवाला देते हुए विद्यालय में नियोजित कर्मचारियों के वेतन भुगतान का आदेश जारी कर दिया.
ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी जल्दबाजी किस बात की थी? पांच दिन पहले विद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के बारे में कोई जानकारी नहीं रहने, पांच दिन के अंतराल पर सब कुछ ठीक होने और वेतन भुगतान के आदेश के पीछे दाल में काला नजर आ रहा है. आखिर डीइओ ने विद्यालय द्वारा भेजी गयी सूची का जांच क्यों नहीं मुनासिब समझा? डीपीओ स्थापना ने भी आंख मूंद कर वेतन भुगतान के अनुपालन में कोई देरी नहीं की? ऐसे कई सवाल हैं जो डीइओ व डीपीओ स्थापना की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
डीइओ द्वारा वेतन मद में 37 लाख रुपये भुगतान के आदेश पर भी उठ रहे सवाल
छह व 11 मई 2015 को डीइओ द्वारा जारी पत्र से खुल रहे गोलमाल के राज
डीपीओ (शिक्षा) स्थापना शाखा से निर्गत पत्रांक 3361 की दो चिठ्ठी खोल रहे धांधली के पोल
आर्य कन्या उच्च विद्यालय में नियम को दरकिनार कर प्रभारी प्रधानाध्यापक के नाम से संचालित बैंक खाता संचालन में गड़बड़ी की शिकायत को देखते हुए स्कूल के सभी बैंक खाता के संचालन पर अगले आदेश तक रोक लगा दिया गया है.
जय सिंह, डीएम.
अभी दो दिनों से बाहर हैं. इस मामले में कुछ नहीं बता सकते हैं.
डॉ ब्रजकिशोर सिंह, डीइओ.
नियमित आर्य कन्या उच्च विद्यालय में सचिव व प्रधानाध्यापक के नाम से संयुक्त बैंक खाता होना चाहिये. लेकिन स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक के नाम से खोले गये बैंक खाता से स्कूल के कामकाज का संचालन हो रहा है. इतना ही नहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विद्यालय के कर्मियों के वेतन मद में 37 लाख रुपये का चेक इंचार्ज हेडमास्टर, आर्य कन्या उच्च विद्यालय के नाम से काट दिया. जो कि सरासर गलत है.
नील कमल दिवाकर, सचिव.

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