हालात . कोसी के विकास को कोसी ने ही लगा दिया विराम
कोसी नदी पर बीपी मंडल पुल बनने के बाद जो विकास का सपना कोसी के लोगों ने देखा था, वह अधूरी रह गई. करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी लोग नाव से ही पार करने को मजबूर हैं.
खगड़िया : कोसी नदी में करोड़ों रुपए पुल पर खर्च करने के बाद लोगों को नाव से पार करने की समस्या से मुक्ति नहीं मिल पाई. इससे कब कोसीवासियों को मुक्ति मिलेगी? यह तो आने वाला समय बताएगा. लोगों की मानें तो कोसी नदी पर बीपी मंडल पुल बनने के बाद जो विकास का सपना कोसी के लोगों ने देखा था, वह अधूरी रह गई. 1990 में कोसी बागमती के संगम पर उसराहा में बने बीपी मंडल पुल का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया था. लेकिन पुल निर्माण के बाद जो लोगों को इस पुल से सुविधा मिली वह चार दिन की चांदनी, फिर अंधेरी रात वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है.
लोगों के मुताबिक पुल के उद्घाटन के बाद लगभग डेढ दशक तक इस पुल के दोनों बगल के एनएच की सड़कें बाढ़ से बार बार तबाह होकर इस पुल को अनुपयोगी बना दिया. जब बाढ़ से लोगों को निजात मिली तब पुल ने ही अपना दम तोड दिया. बीते 29 अगस्त 2010 को पुल के पाया नंबर 17 ,18 एवं 19 में आए धंसान के बाद जो समस्या उत्पन्न हुई है, उसका स्थाई समाधान लगभग छह वर्ष बाद भी नहीं निकल पाया. पुल को बचाने एवं वैकल्पिक व्यवस्था करने आदि के नाम कई करोड़ रुपए खर्च किए गए.
इसके बाद भी लोगों को इन वर्षों में नाव की सवारी करनी ही पड़ी. स्टील ब्रीज पाईल पुल को विकल्प के रूप में बनाकर यह दावा किया गया था कि इस अवधि में पुल के क्षतिग्रस्त भाग को तोड़ कर मरम्मति कार्य पूरा कर लिया जाएगा. लेकिन इसके विपरीत यह हुआ कि अस्थाई विकल्प के रुप में बने स्टील ब्रीज पाईल पुल बह गया, तब जाकर डुमरी पुल के मरम्मति कार्य को करने की प्रशासनिक स्वीकृति मिली. जिससे समस्या यथावत रह गई.
कब मिलेगी घाट-बाट की समस्या से निजात
नवंबर 2014 मे डुमरी पुल के मरम्मति को लेकर एसपी सिंगला कंपनी को लगभग 50 करोड़ की लागत से एक्सट्रा डोज स्टे केबुल ब्रीज तकनिक से मरम्मति करने का कार्यादेश मिला, कार्यादेश मिलने के बाद 18 माह में कार्य पूरा करने का एग्रीमेंट किया गया. कोसी के मिजाज एवं कार्य एजेंसी के नफा नुकसान के पेंच में फसकर पुल की मरम्मति कार्य निर्धारित अवधि समाप्त हो जाने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया.
