तत्कालीन सिविल सर्जन पर भी उठी अंगुली

तत्कालीन सिविल सर्जन पर भी उठी अंगुली दवा खरीद में लिपिक ने पूरी गड़बड़ी के लिए सीएस को ठहराया जिम्मेवार पिछले दरवाजे से प्रतिबंधित फर्म को भी दे दिया दस लाख की दवा आपूर्ति का ठेका क्रय समिति में शामिल लोगों पर भी उठाये गये सवाल, बिना जांच के कैसे दी मंजूरी ब्लैक लिस्टेड कंपनी […]

तत्कालीन सिविल सर्जन पर भी उठी अंगुली दवा खरीद में लिपिक ने पूरी गड़बड़ी के लिए सीएस को ठहराया जिम्मेवार पिछले दरवाजे से प्रतिबंधित फर्म को भी दे दिया दस लाख की दवा आपूर्ति का ठेका क्रय समिति में शामिल लोगों पर भी उठाये गये सवाल, बिना जांच के कैसे दी मंजूरी ब्लैक लिस्टेड कंपनी को पिछले दरवाजे से ठेका देने में पैसे के खेल की आशंका प्रतिनिधि, खगड़ियास्वास्थ्य विभाग में करोड़ों के घपले की परत धीरे धीरे खुल रही है. प्रतिबंधित दवा की खरीद से लेकर दोबारा भुगतान तक कर देने में माहिर स्वास्थ्यकर्मी अभी भी मजे से नौकरी कर रहे हैं. इधर, स्वास्थ्य विभाग पत्र व्यवहार में लगा हुआ है. आठ वर्ष पूर्व की खरीद में गोलमाल में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं. ब्लैक लिस्टेड कंपनी को ठेका देने में सारे नियम कायदे ताक पर रख दिये गये. इधर, आरोप के घेरे में आये सीएस कार्यालय के तत्कालीन लिपिक अशोक कुमार जयैयार ने स्पष्टीकरण के जवाब में पूरी खरीद में गड़बड़ी के लिए तत्कालीन सिविल सर्जन डाॅ आइडी रंजन को जिम्मेवार ठहराया है. डॉ रंजन फिलहाल यक्ष्मा प्रशिक्षण विभाग के निदेशक पद पर पटना में तैनात हैं. आठ वर्षों से दबा था मामला 30 अगस्त, 2007 को ब्लैक लिस्टेड फर्म बोधगया के बुद्धा मेडिको कंपनी को अनुमोदित दर पर 10 लाख 92 हजार के बैंडेज की आपूर्ति करने पर क्रय समिति ने मुहर लगा दी. औषधि निरीक्षक द्वारा भौतिक सत्यापन प्रतिवेदन व दवा अनुज्ञप्ति के लिए बुद्धा मेडिको को अयोग्य माना गया था. पर, पिछले दरवाजे से सारे नियम कायदे ताक पर रख कर क्रय समिति ने आपूर्ति की फाइल पर मुहर लगा दी. इस मामले में आरोप के घेरे में आये लिपिक अशोक कुमार जयैयार रिटायर कर गये हैं. 15. 91 लाख की प्रतिबंधित दवा की हुई खरीद सरकारी राशि का दुरुपयोग करने में स्वास्थ्य विभाग ने सारी हद पार कर दी. सारे नियम को ताक पर रख कर 15.91 लाख की प्रतिबंधित दवाई खरीद पर क्रय समिति ने आंख मूंद कर मुहर लगा दिया. इतना ही नहीं 2.18 लाख रुपये का दोबारा भुगतान करने में भी परहेज नहीं किया. वैट राशि में 2.31 लाख का सरकार को चूना लगाया गया. ऐसी कई अनियमितता सामने आने के बाद सिविल सर्जन पूरे मामले की फाइल क्षेत्रीय स्वास्थ्य निदेशक मुंगेर को भेज कर कार्रवाई से पल्ला झाड़ लिये हैं. इस मामले में आरोपी लिपिक विनय कुमार मिश्र के स्पष्टीकरण को सिविल सर्जन ने असंतोषजनक करार देते हुए क्षेत्रीय निदेशक से मार्गदर्शन मांगा है. तत्कालीन सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात लिपिक विनय कुमार मिश्र फिलहाल अलौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात हैं.

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