डीएम का आदेश गलत या डीइओ का स्पष्टीकरण !

डीएम का आदेश गलत या डीइओ का स्पष्टीकरण ! मामला करोड़ों के गबन के मामले में 111 प्रधान शिक्षकों पर कार्रवाई का तत्कालीन डीएम ने दोषी पर प्राथमिकी/निलंबन का दिया गया था आदेश डीएम के आदेश देने के एक महीने बाद डीइओ ने पूछा था स्पष्टीकरण शिक्षकों से स्पष्टीकरण की आड़ में मामले को किया […]

डीएम का आदेश गलत या डीइओ का स्पष्टीकरण ! मामला करोड़ों के गबन के मामले में 111 प्रधान शिक्षकों पर कार्रवाई का तत्कालीन डीएम ने दोषी पर प्राथमिकी/निलंबन का दिया गया था आदेश डीएम के आदेश देने के एक महीने बाद डीइओ ने पूछा था स्पष्टीकरण शिक्षकों से स्पष्टीकरण की आड़ में मामले को किया रफा-दफा किये जाने से उठे सवाल डीएम के आदेश को ताक पर रख डीइओ के स्पष्टीकरण पूछे जाने के पीछे का राज क्या?कहते हैं अधिकारी जिला शिक्षा पदाधिकारी डॉ. ब्रज किशोर सिंह ने कहा कि निलंबन से पूर्व एक बार स्पष्टीकरण किया जाता है. सो 111 में से 58 शिक्षकों से स्पष्टीकरण तलब किया गया था. कई पर कार्रवाई भी हुई. डीएम द्वारा गबन के आरोपी प्रधान शिक्षकों पर प्राथमिकी व निलंबन के आदेश के एक महीने बाद बाद स्पष्टीकरण पूछे जाने के औचित्य के सवाल पर डीइओ कन्नी काट गये. —————-प्रखंडवार ब्यौराखगडि़या – 16 अलौली -28मानसी – 07चौथम – 21गोगरी – 15परबत्ता – 15बेलदौर -09———-कुल : 111 पूरे घटनाक्रम पर एक नजर 03-01-2015 : बैठक पर दोषी प्रधान शिक्षकों पर कार्रवाई पर बनी सहमति 09-01-2015 : विभिन्न टेबल से गुजरते हुए डीइओ ने दिया निलंबन/प्राथमिकी का आदेश 18-01-2015 : तत्कालीन डीएम ने कार्रवाई का आदेश देते हुए एक सप्ताह के अंदर मांगा अनुपालन प्रतिवेदन 18-02-2015 : डीएम के आदेश के एक महीने बाद डीइओ ने दागी प्रधान शिक्षकों से पूछा स्पष्टीकरण (नियमत: डीएम के आदेश बाद डीइओ द्वारा स्पष्टीकरण पूछे जाने का कोई औचित्य नहीं है. लेकिन जिला शिक्षा पदाधिकारी ने डीएम के आदेश को दरकिनार कर स्पष्टीकरण की आड़ में मामले को रफा-दफा कर दिया.)——————–जनवरी 2015 में हुई जांच में सरकारी विद्यालयों में कई गड़बडि़यों के खुलासे बाद 111 प्रधान व शिक्षकों पर प्राथमिकी/निलंबन की कार्रवाई की अनुशंसा की गयी थी. जिसमें तत्कालीन डीएम ने एक सप्ताह के अंदर अनुपालन प्रतिवेदन सौंपने को कहा था. लेकिन अब तक कार्रवाई पूरी नहीं हो पायी है. अनिल कुमार सिंह. डीपीओ सर्व शिक्षा अभियान ————-आये दिन हो रहे खुलासे से शिक्षा विभाग कटघरे मंे है. खासकर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय मंे चल रहे कारनामे की बात ही निराली है. यहां डीएम के आदेश भी रद्दी की टोकरी मंे डाल दिया जाता है. तभी तो करोड़ों के गबन के मामले मंे डीएम द्वारा दिये गये प्राथमिकी व निलंबन के आदेश को ताक पर रख कर स्पष्टीकरण की आड़ में कुछ और ही खेल को अंजाम दिया जाता है. ————————-खगडि़या. शिक्षा विभाग में डीएम के आदेश भी कोई मायने नहीं रखते हैं. सारी प्रक्रिया पूरी किये जाने के बाद डीएम दागी 111 शिक्षकों पर निलंबन/प्राथमिकी का आदेश देते हैं. जिसमें सात दिनों के अंदर अनुपालन प्रतिवेदन सौंपना था. अब जरा जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय का कारनामे पर गौर करें. डीएम के आदेश का अनुपालन तो दूर जिला शिक्षा पदाधिकारी उस आदेश के एक महीने बार फिर से स्पष्टीकरण पूछने लगते हैं. ऐसे मंे सवाल उठता है कि आखिर डीएम के आदेश पर दागी शिक्षकांे पर कार्रवाई की बजाय जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा स्पष्टीकरण पूछे जाने के पीछे राज क्या था? जब पूर्व में स्पष्टीकरण जैसी सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद निलंबन/प्राथमिकी का आदेश दिया गया तो एक महीने बाद फिर से स्पष्टीकरण पूछे जाने का क्या औचित्य है. हाल के दिनों मंे लगातार हो रहे खुलासे से शिक्षा विभाग कटघरे में हैं. खासकर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में नियम को ताक पर रख कर पिछले दरवाजे से कई गड़बड़ी को अंजाम दे दिया जाता है और किसी को कानों कान भनक तक नहीं लगती है. ऐसे एक दो नहीं बल्कि दर्जनों मामले हैं जिसमें परदे के पीछे खेल कर दोषी को सजा की बजाय बचाने का काम किया गया है. बताया जाता है कि स्पष्टीकरण की आड़ में यहां नजराना का खेल होता है. पूरी जांच हो तो अधिकारी के साथ साथ कई कर्मचारियों की गरदन लपेटे मंे आ सकते हैं. हालांकि जिला शिक्षा पदाधिकारी डॉ ब्रज किशोर सिंह किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से साफ तौर पर इंकार करते हैं. लेकिन परदे से बाहर आ रही सच्चाई कुछ और ही इशारा कर रही है. ————————स्पष्टीकरण की आड़ मंे दबाया मामला 18 जनवरी 2015 को तत्कालीन डीएम राजीव रौशन ने सरकारी स्कूल के भवन निर्माण की करोड़ों की राशि गबन के मामले में जिले के 111 प्रधान शिक्षकों पर प्राथमिकी/निलंबन का आदेश देते हुए सात दिनों के अंदर अनुपालन प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश दिया था. काफी मशक्कत के बाद करीब तीन दर्जन से अधिक शिक्षकांे पर कार्रवाई भी हुई. लेकिन अधिकांश दागी शिक्षकों को स्पष्टीकरण की आड़ में कोई कार्रवाई नहीं हुई. शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि नियमत : डीएम के आदेश के बाद डीइओ के स्पष्टीकरण पूछने का कोई औचित्य नहीं है. —————डीएम सही या डीइओ ?करीब दस वर्षों तक सरकारी पैसों का उठाव कर भवन निर्माण की बजाय संबंधित शिक्षक मौज करते रहे. इस बीच स्पष्टीकरण सहित कई बार निलंबन सहित प्राथमिकी की धमकी का इन पर कोई असर नहीं हुआ. आखिरकार जनवरी 2015 में तत्कालीन डीएम राजीव रौशन ने करोड़ांे की सरकारी राशि गबन करने वाले दागी शिक्षकांे पर प्राथमिकी/निलंबन कर सात दिनों के अंदर अनुपालन प्रतिवेदन सौंपने का आदेश दिया. डीएम के आदेश के पूर्व डीइओ से लेकर तमाम शिक्षा अधिकारी के टेबल से फाइल गुजरी. जिस पर इन अधिकारियांे के हस्ताक्षर भी हैं. लेकिन डीएम के आदेश के एक महीने बाद फिर से जिला शिक्षा पदाधिकारी को स्पष्टीकरण पूछने की याद आई. ऐसे मंे सवाल उठता है कि क्या तत्कालीन डीएम ने नियम को ताक पर रख कर निंलबन/प्राथमिकी का आदेश दिया था या फिर जिला शिक्षा पदाधिकारी स्पष्टीकरण की आड़ कुछ और ही खिचड़ी पकाने मंे कामयाब रहे.

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