प्राथमिकी रोकने के लिए दबाव देने वाला वीआईपी कौन ? – चौथम बीइओ ने कहा, वीआइपी की पैरवी व अधिकारी के मौखिक आदेश के कारण रुकी प्राथमिकी – मामला प्राथमिक विद्यालय कात्यायनी स्थान के प्रधान शिक्षक व पूर्व प्रधान पर प्राथमिकी के आदेश का – 17 सितंबर को निर्गत प्राथमिकी के आदेश का महीनों तक फाइलों में दबे रहने के पीछे का क्या है राज -भ्रमण के दौरान स्कूल पहुंचे डीएम के समक्ष ग्रामीणों ने स्कूल प्रधान के कारनामे की खोली थी पोल – डीएम के निर्देश पर डीपीओ मध्याह्न भोजन की जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का हुआ था खुलासा – जांच रिपोर्ट के आधार पर डीइओ ने प्रधान शिक्षिका व पूर्व प्रधान शिक्षक पर दिया प्राथमिकी का आदेश – प्राथमिकी से बचने के लिये प्रधान शिक्षिका कर रही तिकड़म, बोली अब ग्रामीणों को नहीं है कोई शिकायत ————————प्रतिनिधि, खगड़ियाप्राथमिक विद्यालय कात्यायनी स्थान की जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के खुलासे के बाद स्कूल की प्रधान शिक्षिका व पूर्व प्रधान शिक्षक पर प्राथमिकी के आदेश को आखिर किस वीआइपी की पैरवी के बल पर रोकना पड़ा. साथ ही चौथम बीइओ को किस अधिकारी ने प्राथमिकी रोकने के लिए मौखिक आदेश दिया था. इस सवाल का जवाब देने से शिक्षा विभाग के अधिकारी हिचक रहे हैं. ऐसे में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है. पूरे घटनाक्रम पर नजर डालें, तो पहले डीएम ने निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों द्वारा शिकायत की झड़ी लगाने, फिर डीपीओ मध्याह्न भोजन की जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा, बाद में जांच रिपोर्ट के आधार पर स्कूल के प्रधान शिक्षक व पूर्व प्रधान शिक्षक पर प्राथमिकी का आदेश जारी करने और अब खुद का आदेश वापस लेने से शिक्षा विभाग की कार्यशैली की पोल खुल गयी है. क्या है पूरा मामला ताजा मामले में पहले डीइओ गोलमाल के मामले में प्रधान शिक्षिका पर प्राथमिकी का आदेश देते हैं. फिर एक महीने के अंदर ही अपना आदेश वापस लेने की बात करते हैं. पूरा मामला प्राथमिक विद्यालय कात्यायनी स्थान से जुड़ा हुआ है. इसके बच्चों ने समाहरणालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन कर प्रधान शिक्षिका पर कई गंभीर आरोप लगाये थे. इसके बाद डीएम के निर्देश पर डीपीओ ने पूरे मामले की स्थलीय जांच की, तो शिकायत सच निकली. डीपीओ ने पूरी जांच रिपोर्ट डीइओ को सौंप दी. इसके बाद 17 सितंबर को डीइओ ने चौथम बीइओ को प्रधान शिक्षिका आशा भारती व पूर्व प्रधान दिवाकर चौधरी पर प्राथमिकी का आदेश जारी करते हुए सात दिनों के अंदर अनुपालन प्रतिवेदन तलब किया था. पर, आदेश ठंडे बस्ते में पड़ा रहा और इधर मामला मैनेज करने का दौर चलता रहा.————- ग्रामीणों द्वारा दोबारा दिये गये आवेदन के आधार पर प्राथमिकी के आदेश पर रोक लगायी गयी है. दोषी शिक्षक ने तीन महीने के अंदर स्कूल के भवन निर्माण का भरोसा दिलाया है. डीपीओ मध्याह्न भोजन की जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी के खुलासा व प्राथमिकी रोकने के लिए वीआइपी की पैरवी व अधिकारी के मौखिक आदेश पर डीइओ ने पल्ला झाड़ लिया. ब्रजकिशोर सिंह, डीइओ क्या कहती हैं प्रधान शिक्षिका प्राथमिक विद्यालय कात्यायनी स्थान की प्रधान शिक्षिका आशा भारती ने कहा कि जांच रिपोर्ट मंे लगाये गये आरोप बेबुनियाद हैं. ग्रामीणों की शिकायत का मामला सुलझ गया है. ग्रामीणों ने पहले दिये आवेदन में किये गये शिकायत वापस लेते हुए फिर से आवेदन देकर कोई कार्रवाई नहीं करने की बात कही है. आशा भारती, प्रधान शिक्षिका,प्रावि कात्यायनी स्थानउन्हें इस मामले में काफी दबाव दिया जा रहा है. कभी वीआइपी की पैरवी, तो कभी विभागीय मौखिक आदेश के कारण अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पायी है. वीआइपी सहित मौखिक आदेश देने वाले अधिकारी का नाम बताने से बीइओ ने पल्ला झाड़ लिया.रामकुमार, बीइओ, चौथम
प्राथमिकी रोकने के लिए दबाव देने वाला वीआईपी कौन ?
प्राथमिकी रोकने के लिए दबाव देने वाला वीआईपी कौन ? – चौथम बीइओ ने कहा, वीआइपी की पैरवी व अधिकारी के मौखिक आदेश के कारण रुकी प्राथमिकी – मामला प्राथमिक विद्यालय कात्यायनी स्थान के प्रधान शिक्षक व पूर्व प्रधान पर प्राथमिकी के आदेश का – 17 सितंबर को निर्गत प्राथमिकी के आदेश का महीनों तक […]
