खगड़िया : जिले में धान फसल की कटनी आधे से अधिक हो चुकी है. धान की कटनी कर किसान अगली फसल की तैयारी को लेकर खलिहान में ही तैयार फसल को कारोबारियों के हाथों औने-पौने दाम में बेचने को विवश हैं. सुखाड़ की मार झेलते हुए किसानों ने धान की खेती में अपना श्रम व पूंजी झोंक दी.
उम्मीद थी कि धान की अच्छी पैदावार एवं उचित मूल्य मिलेगा. साथ ही पूंजी के अभाव में इस बार रवी फसल की खेती बरबाद नहीं होगी.
पर, इलाके के लगभग 70 फीसदी धान की फसल अक्तूबर माह के अंत तक कट कर तैयार हो चुकी है. किसान अपने तैयार फसल को बेचने के लिए सरकार व विभाग की ओर टकटकी लगाये हैं, बावजूद किसानों के तैयार धान को खरीदने के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई कदम उठाया नहीं गया है.
न ही समर्थन मूल्य पर इनके धान खरीदने का कोई संकेत ही विभागीय स्तर पर किसानों को मिल रहा है. कहते हैं किसान बोबिल भोराहा के किसान महेन्द्र सिंह, यदुबासा के कुलदीप पासवान समेत दर्जनों किसान ने बताया कि सरकार की सभी योजनाएं हवा हवाई साबित हो रही हैं.
कृषि विभाग की जल संग्रहण योजना, मिनी गोदाम योजना, साहुकारों के चंगुल से मुक्ति के लिए केसीसी योजना समेत कई महत्वपूर्ण योजनाएं या तो रसूखदार लोगों के लिए कामधेनु बनी हैं या सरकारी फाइलो में धूल फांक रही है.
किसान तो बस भगवान भरोसे प्रकृति की मार झेलते हुए खेती कर अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को विवश हैं. नवंबर तक रवि फसल की बुआई होती है. आखिर इसके लिए रकम किसान कहां से लायेंगे. सरकारी उपेक्षा के कारण तो किसानों को औने पौने दामों में फसल बेचना नियति बन गयी है. कहते हैं व्यवसायी खुदरा व्यापारी चंद्रमणि प्रसाद ने बताया कि नमी एवं बाजार में कीमत कम होने के कारण फसल की कीमत घट गयी है.
उन्होंने बताया कि 950 -1000 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदा जा रहा है. कहते हैं बीडीओ बीडीओ अमरेन्द्र कुमार सिन्हा ने बताया कि समर्थन मूल्य पर धान क्रय करने के लिए विभाग द्वारा कोई निर्देश नहीं मिला है. निर्देश मिलने पर किसानों को समुचित लाभ दिया जायेगा. वहीं जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि मूल्य से संबंधित जानकारी नहीं है.
कहते हैं जिला सहकारिता पदाधिकारी जिला सहकारिता पदाधिकारी रामाश्रय राम ने बताया कि धान के समर्थन मूल्य से संबंधित किसी प्रकार का निर्देश अब तक नहीं मिला है. पिछले वर्ष 1360 रुपया प्रति क्विंटल धान का मूल्य निर्धारित किया गया था. साथ ही 300 रुपये बोनस दिया जा रहा था.
