धमाराघाट हादसा : आज भी स्टेशन पर कुछ नहीं बदला

खगड़िया/चौथम:धमारा घाट स्टेशन पर 19 अगस्त, 2013 को हुए हादसे के दो वर्ष गुजर गये, लेकिन अभी तक रेल प्रशासन ने यात्री की सुविधाओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं की. इसलिए उक्त घटना की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता. दो वर्ष पूर्व धमारा घाट स्टेशन पर 19 अगस्त को पटना जाने वाली राज्यरानी […]

खगड़िया/चौथम:धमारा घाट स्टेशन पर 19 अगस्त, 2013 को हुए हादसे के दो वर्ष गुजर गये, लेकिन अभी तक रेल प्रशासन ने यात्री की सुविधाओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं की.

इसलिए उक्त घटना की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता. दो वर्ष पूर्व धमारा घाट स्टेशन पर 19 अगस्त को पटना जाने वाली राज्यरानी एक्सप्रेस से कट कर 34 लोगों की मौत हो गयी थी.

इस दर्दनाक हादसे के बाद काफी हो हल्ला मचा था. हादसे की जांच में फूट ओवरब्रिज नहीं रहने से लोगों के रेलवे लाइन पार करने को मुख्य कारण माना गया. बता दें कि धमाराघाट रेलवे स्टेशन के समीप स्थित ऐतिहासिक कात्यायनी स्थान मंदिर में सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को भारी भीड़ जुटती है.

घटना वाले दिन भी सहरसा से आने वाली ट्रेन से उतरने के बाद रेल यात्री रेलवे लाइन पार कर कात्यायनी मंदिर की ओर जा रहे थे.इसी बीच सहरसा से पटना जाने वाली राज्यरानी सुपरफास्ट एक्सप्रेस की चपेट में आकर 34 लोगों की मौत हो गयी थी. इसके बाद ट्रेन में आग लगाने के अलावा बड़ा आंदोलन हुआ था. तत्कालीन रेल राज्य मंत्री अधीर रंजन चौधरी ने घटनास्थल पर पहुंच कर धमारा घाट रेलवे स्टेशन के सौंदर्यीकरण सहित यात्री सुविधाओं में विस्तार की घोषणा की थी.

कहते हैं समाजसेवी
रेल उपभोक्ता संघर्ष समिति के संयोजक सुभाष चंद्र जोशी ने बताया कि यात्री सुविधा की व्यवस्था अब तक नहीं हो पायी है. जबकि तत्कालीन रेल राज्य मंत्री ने आश्वासन दिया था कि धमारा घाट स्टेशन का आधुनिकीकरण किया जायेगा. पर, स्टेशन पर न तो समुचित रोशनी की व्यवस्था है और न ही पानी की. शौचालय का भी यही हाल है. उन्होंने रेल मंत्री से अविलंब यात्री सुविधा बहाल करने की मांग की है. वहीं उन्होंने प्लेटफॉर्म पर चार रेलवे ट्रैक बिछाने की मांग की है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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