डुमरी में डूबा कोसी का सपना
खगड़िया: वर्षो से उपेक्षित कोसी इलाके की करीब 50 लाख आबादी के सपने की उपेक्षा आज भी जारी है. सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, खगड़िया की लाइफ लाइन कही जाने वाली कोसी नदी पर बने डुमरी पुल टूट जाने के कारण लोगों के सपने भी टूट से गये हैं. एनएच 107 पर कोसी नदी पर बने पुल […]
खगड़िया: वर्षो से उपेक्षित कोसी इलाके की करीब 50 लाख आबादी के सपने की उपेक्षा आज भी जारी है. सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, खगड़िया की लाइफ लाइन कही जाने वाली कोसी नदी पर बने डुमरी पुल टूट जाने के कारण लोगों के सपने भी टूट से गये हैं. एनएच 107 पर कोसी नदी पर बने पुल का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया था.
इसके 20 वर्ष बाद 29 अगस्त, 2010 को पुल क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण आवागमन बंद कर दिया गया. पुल टूटने के बाद करीब 17 करोड़ से बनायी गयी स्टील पाइल ब्रिज भी कोसी की तेज धारा में बहने के साथ ही इस इलाके के लोगों के अरमान भी बह गये . फिलहाल पुल के अभाव में नाव का ही सहारा है, जो खतरे से खाली नहीं है.
बेलदौर विधायक पन्ना लाल पटेल भी मानते हैं कि पुल टूटने से इलाका 20 साल पीछे चला गया है. फसल की कीमत कम मिलने से किसान कराह रहे हैं, तो छात्र- छात्रओं को पढ़ाई बीच में ही छोड़ देनी पड़ती है.
पीला सोना बना जी का जंजाल : एशिया में मक्का उत्पादन के लिए विख्यात खगड़िया खासकर बेलदौर प्रखंड में इसे पीला सोना कहा जाता है. यहां करीब 90 फीसदी भू-भाग पर मक्के की खेती होती है. इसे बेच कर इस इलाके के करीब 50 हजार परिवारों के सारे अरमान पूरे होते हैं. पर, डुमरी पुल के टूटे रहने के कारण किसानों के लिए मक्का मुसीबत बन गया है. आवागमन का साधन नहीं होने के कारण किसानों को औने-पौने दाम पर मक्का बेचना पड़ता है.
कोसी बागमती के पानी के दबाव से धंसा पुल का पाया : स्थानीय बुजुर्ग सियाराम यादव की मानें, तो पुल निर्माण के वक्त इलाके के एक मंत्री के दबाव में पहले से चयनित स्थान परिवर्तित कर सोनवर्षा घाट व उसराहा चौक के बीच पुल निर्माण किया गया. पुल निर्माण स्थल के नीचे कोसी व बागमती आ कर मिलती है. इसके कारण यहां पानी की धारा व दबाव ज्यादा रहता है. इसका नतीजा है कि बनने के 20 वर्ष बाद ही पुल का पाया धंस गया. साथ ही इसके और भी दुष्परिणाम से क्षेत्र की जनता जूझ रही है.