फोटो है 6 मेंकैप्सन- चिल्ड्रेन पार्क में वितरण करते मवेशी.प्रतिनिधि, खगडि़या खेलकूद से बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास होता है. इसी धारणा को ले सरकार द्वारा भी स्कूलों में विभिन्न तरह के खेलकूद का किया गया है, लेकिन जिले के कई विद्यालय आज भी मैदान विहीन बने हुए हैं. इस विद्यालय को मैदान है भी तो वह रखरखाव के अभाव में बेकार ही बना है. वहीं शहर की परिकल्पना के साथ ही जेहन में सभी तरह की सुविधाएं आती हैं. सड़क, पानी, बिजली, नाला आदि के अलावा शहरों में बच्चों के खेलने के लिए मैदान, पार्क बने होते हैं. इन्हीं मैदान व पार्क में बच्चे खेलते हैं. स्मार्ट सिटी में तो बच्चों के खेलने-कूदने की व्यवस्था भी स्मार्ट ही होती है. लेकिन अपने शहर में ऐसा कुछ भी नहीं. बच्चों के खेलने-कूदने के नाम पर शहर में चित्रगुप्त नगर स्थित चिल्ड्रेन पार्क व गांधी पार्क है. पार्क का आलम यह है कि यह बच्चों के खेलने के लिए कम माल-मवेशी के चरने के लिए ज्यादा उपयुक्त बना हुआ है. वहीं शहर में खेलने के लिए तो कई मैदान हैं. लेकिन समुचित व्यवस्था किसी में नहीं की गयी है. जेएनकेटी स्टेडियम की बात करें तो बारिश के मौसम में मैदान में घुटने भर से अधिक पानी भर जाता है. वहीं बाजार समिति मैदान में एसएफसी के गोदाम बन जाने से वहां भी युवाओं को खेलने में कठिनाई हो रही है. मैदान का आकार भी दिनोदिन सिकुड़ता जा रहा है. कुल मिला कर कहा जा सकता है कि शहर में एक भी ऐसा स्टेडियम नहीं है जहां से खिलाडि़यों के प्रतिभा को निखारा जा सके. और वे बेहतर अभ्यास से राज्य से लेकर देश का नाम रोशन कर सके.
खेल का मैदान बना मवेशियों का चारागाह
फोटो है 6 मेंकैप्सन- चिल्ड्रेन पार्क में वितरण करते मवेशी.प्रतिनिधि, खगडि़या खेलकूद से बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास होता है. इसी धारणा को ले सरकार द्वारा भी स्कूलों में विभिन्न तरह के खेलकूद का किया गया है, लेकिन जिले के कई विद्यालय आज भी मैदान विहीन बने हुए हैं. इस विद्यालय को मैदान है […]
