गोगरी (खगड़िया): गोगरी थानाध्यक्ष के नेतृत्व में टीम गठित कर गुप्त सूचना के आधार पर गोरैया बथान गांव में छापेमारी कर शातिर अजय यादव की गिरफ्तारी के बाद एक ओर जहां पुलिस ने राहत की सांस ली है, वहीं लोग भी अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. पूर्व में तो अजय यादव के आतंक से क्षेत्र के लोग तो आतंकित थे ही, लेकिन वर्चस्व और बुद्धूराम बगीचा के आधिपत्य को लेकर को तीन माह से गांव रणभूमि में बदल चुका था. ग्रामीण रह-रह कर हो रही गोलीबारी से तंग आ चुके थे तथा भय में जी रहे थे.
अजय यादव की आपराधिक कुंडली को खंगालने के बाद पता चला कि गोगरी व मुंगेर जिले में उसके खिलाफ लूट, डकैती, छिनतई, रंगदारी व आर्म्स एक्ट के कई मामले दर्ज हैं. कुख्यात अजय का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है. कुछ माह से वह अपने गांव के आस-पास ही रह कर वहां स्थित एक बगीचा पर आधिपत्य जमाना चाहता था. इसे लेकर गांव के ही जनार्दन यादव एवं अजय यादव के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी. इसके तहत तीन माह में गांव में ही दोनों के बीच दर्जनों बार गोलीबारी हो चुकी थी और अब तक यह सिलसिला जारी ही था. इसमें जनार्दन यादव सहित आधा दर्जन लोग गोली लगने से घायल भी हुए थे.
छिप कर करा रहा था इलाज
मई में गोलीबारी में खुद अजय यादव भी गोली लगने से घायल हुआ था तथा पुलिस से बचने के लिए छिप कर अपना इलाज करा रहा था. चार दिन पूर्व भी दोनों के बीच गोलीबारी हुई थी. सूत्रों की मानें, तो घायल होने के कारण ही अजय आसानी से पुलिस पकड़ में आ गया. वर्चस्व को लेकर यह गोलीबारी पुलिस के लिए सिर दर्द बन गयी थी. मगर घटना के बाद हर बार अजय पुलिस की पकड़ से बचता रहा था. हालांकि अजय यादव पर पूर्व से ही डेढ़ दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं. इतना ही नहीं अजय यादव मुंगेर के बरियारपुर थाना क्षेत्र के दियारा में भी लूट व गोलीबारी कर चुका है. इसकी तलाश गोगरी ही नहीं, बल्कि बरियारपुर थाना पुलिस को भी वर्षो से थी.
