फोटो है …. अनिल पतंग का नाम से गया हैप्रतिनिधि, खगडि़याबिहार की लोक संस्कृति को संजोये रखने का प्रयास है फिल्म जट-जटिन. बिहार में कई फिल्मों का निर्माण हुआ, लेकिन फिल्म जट-जटिन पूरी तरह बिहार की सभ्यता, संस्कृति व परंपराओं से संबंधित है. उक्त बातें फिल्म जट-जटिन के लेखक सह कवि अनिल पतंग ने रविवार को कोसी कॉलेज में आयोजित कवि सम्मेलन के दौरान कहीं. उन्होंने बताया कि फिल्म जट-जटिन पूरी तरह बिहार की परंपराओं पर आधारित है. इसे देख युवा वर्ग भी अपनी परंपराओं को जान सकेंगे व इसके महत्व को समझ सकेंगे. फिल्म में ज्यादा से ज्यादा किरदार बिहार के कलाकार निभाये हैं. इससे उनकी प्रतिभा को और निखारेगी. यह फिल्म लोग पूरे परिवार के साथ देख सकेंगे. फिल्म की पूरी शुटिंग बिहार में की गयी है. यह फिल्म जल्द ही लोगों के मनोरंजन के लिए तैयार हो जायेगी. फिल्म की 95 प्रतिशत शुटिंग पूरी हो चुकी है. जल्द ही यह फिल्म सिनेमाघरों में दिखाई जायेगी. श्री पतंग की किताब रंग अभियान ने भी बिहार में अपनी अलग पहचान बना रखी है. बिहार की सभ्यता और संस्कृति को बचाये रखने में श्री पतंग ने अपना बहुमूल्य समय दिया है. उन्होंने बताया कि जट-जटिन की कहानी भी बिहार से जुड़ी है तथा जट-जटिन के नाटक (अभिनय) को बिहार में काफी लोकप्रियता मिली थी. इसके बाद जट-जटिन की लोकप्रिय कहानी को परदे पर दिखाने का निर्णय लिया गया. उन्होंने बताया फिल्म में ऑफ स्क्रीन का कार्य मुंबई के बेस्ट कलाकारों द्वारा किया जा रहा है. फिल्म में बेस्ट साउंड, बेस्ट लाइट व बेस्ट कैमरे का इस्तेमाल किया गया है, जिससे लोगों को यह फिल्म पसंद आयेगी. उन्होंने बिहार में फिल्म को बेहतर रिस्पांस मिलने की उम्मीद जतायी.
बिहार की संस्कृति को संजोये रखने का प्रयास है फिल्म जट-जटिन
फोटो है …. अनिल पतंग का नाम से गया हैप्रतिनिधि, खगडि़याबिहार की लोक संस्कृति को संजोये रखने का प्रयास है फिल्म जट-जटिन. बिहार में कई फिल्मों का निर्माण हुआ, लेकिन फिल्म जट-जटिन पूरी तरह बिहार की सभ्यता, संस्कृति व परंपराओं से संबंधित है. उक्त बातें फिल्म जट-जटिन के लेखक सह कवि अनिल पतंग ने रविवार […]
