तब जा कर शादी होती है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को परेशानी हो रही है. लोगों को कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले अधिकतर लोगों के बच्चों के पास आयु संबंधी प्रमाण-पत्र नहीं होता है. ऐसे में विवाह के समय जन्म प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने में मुश्किल होती है. उन्होंने बताया कि जिन लोगों के पास उक्त दस्तावेज होते हैं, उन्हें भी रात में मंदिर प्रशासन द्वारा प्रमाण-पत्रों को राजपत्रित अधिकारी से अभिप्रमाणित करने का फरमान सुनाया जाता है. ऐसी स्थिति में अब लोग सिंहेश्वर मंदिर में अपने बच्चों की शादी कराने से परहेज कर रहे हैं. उक्त कड़े विवाह नियमों की वजह से अब लोग दूसरे मंदिरों में जाना बेहतर समझते हैं. इसका खामियाजा यहां के स्थानीय व्यवसायियों को भुगतना पड़ रहा है़ स्थानीय होटल खाली पड़े रहते हैं, तो आभूषण व्यवसायी भी चिंतित हैं.
वहीं किराना-श्रृंगार, रेडीमेड वस्त्र की दुकान व विवाह से संबंधित सामग्री की दुकानों पर दुकानदार खाली बैठने के लिए मजबूर होने लगे हैं. इस संबंध में व्यापारी अशोक साह कहते हैं कि विगत तीन वर्षो से बाबा के दरबार में विवाह संबंधी कड़े नियमों की वजह से लोग परेशान हैं. आभूषण व्यवसायी विपिन बिहारी कहते हैं कि अगर मंदिर की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो सैकड़ों व्यवसायियों के घर चूल्हा बंद करने की नौबत आ जायेगी़ स्वर्णकार शंकर साह कहते हैं कि पहले लोग बाहर से सिंहेश्वर स्थान व्यवसाय करने के लिए आते थ़े यही कारण रहा कि सैकड़ों सालों में यहां एक ऐसा बाजार का निर्माण हो गया, जो मंदिर आने वाले श्रद्घालुओं की जरूरतों पर आधारित है़ लेकिन प्रशासन की मनमानी के कारण श्रद्घालुओं के हित प्रभावित हो रहे हैं और बाजार प्रभावित हो रहा है़ होटल व्यवसायी अरविंद साह कहते हैं कि सिंहेश्वर में व्यवसायियों की आमदनी का एकमात्र जरिया लगन और मेला ही था, लेकिन विगत कुछ वर्षो से व्यापारियों के हित की अनदेखी की जा रही है़ होटल व्यवसायी सह उपप्रमुख राजेश रंजन झा कहते हैं कि कानून का पालन हो लेकिन उसी कानून के कारण सही व्यक्ति भी परेशान नहीं हों, यह देखना होगा़ व्यवसायी कैलाश भगत कहते हैं कि मंदिर पर विवाह के लिए उम्र संबंधी कानून लागू किये जाने से बेमेल शादियों पर रोक तो लगी है, लेकिन सही शादियां भी कागज के अभाव में नहीं हो पाती हैं.
