सड़क मार्ग के आवागमन पर लग सकता है ग्रहण

चौथम: बीपी मंडल सेतु पर आवागमन पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगाये जाने के बाद एक बार फिर से कोसीवासियों के समक्ष आवागमन की समस्या उत्पन्न हो गयी है. कोसी क्षेत्र का सड़क संपर्क मार्ग पूर्ण रुप से बाधित हो गया है. गत पांच वर्षो से आवागमन की समस्या से जूझ रहे कोसी क्षेत्र लोगों […]

चौथम: बीपी मंडल सेतु पर आवागमन पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगाये जाने के बाद एक बार फिर से कोसीवासियों के समक्ष आवागमन की समस्या उत्पन्न हो गयी है. कोसी क्षेत्र का सड़क संपर्क मार्ग पूर्ण रुप से बाधित हो गया है. गत पांच वर्षो से आवागमन की समस्या से जूझ रहे कोसी क्षेत्र लोगों को बीपी मंडल सेतु पर पांव पैदल, ठेला, रिक्शा सहित बाइक के परिचालन से राहत थी, लेकिन बीपी मंडल सेतु के निर्माण कार्य शुरू होते ही आवागमन की मिल रही राहत पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गयी.

आवागमन की समस्या से जूझ रहे बेलदौर के सर्वदलीय जन प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों सहित एनएच के अधिकारियों को वैकल्पिक बीपी मंडल पर उक्त परिचालन राहत पर पाबंदी के पहले आवागमन के वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग रखी थी. बावजूद आवागमन की समस्या से प्रशासन, एनएच विभाग सहित सरकार बेखबर रहे. हालात ऐसी हो गयी कि बगैर कोई प्रशासनिक स्वीकृति के स्थानीय लोगों ने आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था के तहत से आठ लाख की लागत से जुगाड़ पुल का निर्माण किया. बहरहाल जुगाड़ सेतु ही आवागमन का एक मात्र साधन रह गया है.

जलस्तर बढ़ा तो बंद हो जायेगा जुगाड़ पुल: जुगाड़ सेतु भी नदी के जल स्तर पर निर्भर करता है. एक से दो महीनों में यदि नदी के जल स्तर से वृद्धि हुई तो जुगाड़ सेतु नाकामयाब साबित होगा. आवागमन पर पूर्ण ग्रहण लग जायेगा. विदित हो कि आगामी विधान सभा चुनाव पर इस समस्या का असर पड़ सकता है. गत पांच वर्षो से क्षतिग्रस्त बीपी मंडल सेतु पर राज्य सरकार व तत्कालीन केंद्र सरकार की उपेक्षित रवैये पर आवागमन की समस्या प्रभावित लोगों आक्रोश व्याप्त है. वहीं सरकार के विरुद्ध कई सवाल खड़े कर रहे है.
10 पाये को तोड़ने में लग सकते हैं तीन महीने: सिगला कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट मैनेजर की माने तो सेतु के क्षतिग्रस्त 10 स्पैन पाया को तोड़ने में तीन माह को समय लग सकता है. वहीं 10 पाया के विरुद्ध दो पाया पर केवल ब्रिज का निर्माण होना है. बहरहाल 31 पाया का बना बीपी मंडल सेतु का नौ पाया क्षेत्र में नदी का पानी फैला है. वहीं क्षतिग्रस्त 10 पाया के नीचे नदी का जल सूखा पड़ा है. ऐसे में सेतु तोड़ने में आसानी है. तोड़ने के कार्य गति तेजी से होगी. वहीं नदी के जल स्तर में हुई वृद्धि से बाढ़ के समय तक कार्य की गति धीमी पड़ सकती है.
बोले एनएच के कार्यपालक अभियंता: एनएच विभाग के कार्यपालक अभियंता रणविजय राम ने बताया कि आवागमन की वैकल्पिक व्यवस्था के तहत स्टील पाइल ब्रिज की मरम्मत के लिए प्रशासनिक स्वीकृति सरकार को भेजी जा चुकी है, जबतक स्वीकृति नहीं मिल जाती है, तब तक कुछ भी नहीं कहा जा सकता है.

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