दो माह तक चलेगा अनुष्ठानप्रतिनिधि, परबत्ताप्रखंड के विभिन्न पंचायतों में डोरा पूजा की जा रही है. इस पूजा का आयोजन महिलाएं अपने पति व पुत्र की दीर्घायु के लिए की जाती है. इस पूजा का आरंभ फाल्गुन मास पूर्णिमा की रात्रि व चेत्र मास की प्रथम सुबह से शुरू होती है. यह पूजा पूरे दो माह तक चलने के बाद वैशाख में संपन्न होगा. प्रत्येक रविवार को इस पूजा का आयोजन किया जाता है. पूजा का संकल्प करने वाली महिलाओं कौशल्या देवी, उर्मिला देवी, अंबा देवी, त्रिपुरा देवी आदि ने बताया कि पुराने दंत कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक प्रसिद्ध राजा की रानी के इस पूजा का अनुष्ठान प्रारंभ किया. राजा अपने धन बल व शक्ति के अहंकार में डोरा के पवित्र धागे को जला दिया. राजा के इस व्यवहार के कारण उसे कष्ट भुगतना पड़ा. इस कष्टकारक काल में राजा ने एक नदी के किनारे महिलाओं की एक टोल को पूजा करते देखा. राजा ने अपने अहंकार का त्याग कर पूजा में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण किया. इसके पश्चात उसे अपना खोया हुआ धन बल तथा राज पाठ पुन: प्राप्त कर लिया. प्रत्येक रविवार को पूजा के समय कथावाचक महिला सप्त माता की कथा सुनाती है. इस दौरान सूर्यदेव को दूध व गंगाजल से अर्घ्य दिया जाता है. पूजा के कई प्रकार के पकवान व मिष्ठान आदि सामग्री का उपयोग किया जाता है. संसारपुर निवासी पंडित अजय कांत ठाकुर व पिपरा निवासी पंडित चंद्र भूषण मिश्र ने बताया कि इस पूजा का आयोजन महिलाओं के द्वारा अपने पति व पुत्रों की दीर्घायु के लिए किया जाता है. इसमें पूजा करने वाली महिलाएं अपने दाहिने हाथ में बांह पर डोरा यानी पवित्र धागा बांध कर कथा श्रवण करती है.
पति के दिर्घायू के लिए महिलाओं ने की डोरा पूजा
दो माह तक चलेगा अनुष्ठानप्रतिनिधि, परबत्ताप्रखंड के विभिन्न पंचायतों में डोरा पूजा की जा रही है. इस पूजा का आयोजन महिलाएं अपने पति व पुत्र की दीर्घायु के लिए की जाती है. इस पूजा का आरंभ फाल्गुन मास पूर्णिमा की रात्रि व चेत्र मास की प्रथम सुबह से शुरू होती है. यह पूजा पूरे दो […]
