खगड़िया: प्लास्टिक की बोतल पर्यावरण के लिए खतरनाक है. इसलिए इस पर रोक लगाने की कवायद भी शुरू है. मुख्य सचिव अंजनी कुमार ने प्लास्टिक बोतल के प्रयोग पर रोक लगाने के लिए जिले के सभी विभागों के उच्च अधिकारी को पत्र भी लिखा है.
होती है तेल व पानी का खपत: प्लास्टिक से बनी सामान का उपयोग तो नुकसान देय है ही इसका निर्माण काफी महंगा है. मुख्य सचिव ने लिखे पत्र में इस बात का उल्लेख किया है कि विश्व भर में कुल तेल का छह प्रतिशत हिस्सा प्लास्टिक के निर्माण में खर्च होता है. प्लास्टिक निर्माण के समय निकलने बाली गैस पर्यावरण के लिए काफी खतरनाक होती है.
इन्होंने कहा कि प्लास्टिक के निर्माण मे भारी मात्र में पानी का भी खपत होता है. इसके अलावे जल-जमाव की स्थिति भी प्लास्टिक के कारण ही उत्पन्न होता है. मुख्य सचिव ने इस बात का भी उल्लेख किया है कि 4 से 5 प्रतिशत प्लास्टिक का ही कचड़ा नली नालों में फंसती है. जिससे जल निकासी की समस्या उत्पन्न हो जाती है.
बोतल पर रोक के निर्देश: मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह के जारी निर्देश के आलोक में वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव विवेक कुमार ने पीएचइडी विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिख कर सरकारी कार्यालयों में पेय जल की समस्या दूर करने के लिए वहां नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का फरमान जारी किया है. इन्होंने प्लास्टिक की बोतल से स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सरकारी कार्यालयों / बैठकों एवं कार्यक्रमों में प्लास्टिक की बोतल के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाकर स्टील अथवा शीशे की बोतल का प्रयोग करने को कहा है.
