फोटो है 3 व 4 में कैप्सन : रोते बिलखते परिजन व घटना की जानकारी लेते बीडीओ व थानाध्यक्ष सड़क हादसे में हुई वृद्धि, रोकथाम के लिए नहीं किये गये कोई उपायप्रतिनिधि, खगडि़यासोमवार को दिन जिले वासियों के लिए कुछ खास नहीं था. सुबह गुनगुनी धूप निकली हुई थी. लोग अभी इस धूप का आनंद उठाने की बात सोच ही रहे थे कि दुर्घटना की खबरें मिलने लगी. पूरे दिन सदर अस्पताल से लोगों के रोने-बिलखने की आवाज आती रही. जैसे-जैसे लोगों को सड़क हादसे में छह लोगों के मारे जाने की सूचना मिलती गयी, लोग सदर अस्पताल परिसर में जमा होते चले गये. सभी यही जानने के लिए बेताब थे कि आखिर मरने वाला कौन था. कुछ मृतक के परिजन वहां पहले से मौजूद थे तो कुछ के परिजन पहुंच रहे थे. जिन मृतक के परिजनों को घटना की जानकारी नहीं थी. उन्हें थानाध्यक्ष व बीडीओ द्वारा सूचना दी जा रही थी. बीच-बीच में जिलाधिकारी भी पूरे घटना की जानकारी बीडीओ से ले रहे थे, जबकि कुछ लोग पिछले घटना का जिक्र कर रहे थे. बीते दो माह में सिर्फ सड़क हादसे में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. ज्यादातर हादसा एनएच 31 पर ही हुआ है. सड़कें चिकनी हो गयी है. लेकिन एहतियात के तौर पर कोई खास कदम नहीं उठाये गये हैं, जिस कारण बाइक या फिर कार चालक जब एनएच 31 पर पहुंचते हैं तो उनकी स्पीड कम होने का नाम नहीं लेती है. दिसंबर 2014 में पसराहा के एनएच 31 पर सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गयी थी, जिसके बाद से एनएच 31 पर स्पीड बोर्ड लगाने पर भी चर्चा होने लगी थी. जिला प्रशासन भी गंभीरता से विचार करने लगा था. लेकिन समय बीता और यह बात भी ठंडे बस्ते में चली गयी.
थम-थम कर आती रही लोगों के रोने-बिलखने की आवाज
फोटो है 3 व 4 में कैप्सन : रोते बिलखते परिजन व घटना की जानकारी लेते बीडीओ व थानाध्यक्ष सड़क हादसे में हुई वृद्धि, रोकथाम के लिए नहीं किये गये कोई उपायप्रतिनिधि, खगडि़यासोमवार को दिन जिले वासियों के लिए कुछ खास नहीं था. सुबह गुनगुनी धूप निकली हुई थी. लोग अभी इस धूप का आनंद […]
