दुनियां छोड़ चला गया दादी के कलेजे का टुकड़ा

बेलदौर. अहले सुबह शीतलहर से बचने को लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंची जंगल सादा की बूढ़ी दादी कमोधिया देवी कंबल पाकर फूले नही समा रही थी. उधर, एनएच 107 पर पिक अप वैन की चपेट में आने से इनका पोता दम तोड़ चुका था. पोते की मौत से बेखबर वृृद्धा कंबल मिलने की खुशी में बीडीओ […]

बेलदौर. अहले सुबह शीतलहर से बचने को लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंची जंगल सादा की बूढ़ी दादी कमोधिया देवी कंबल पाकर फूले नही समा रही थी. उधर, एनएच 107 पर पिक अप वैन की चपेट में आने से इनका पोता दम तोड़ चुका था. पोते की मौत से बेखबर वृृद्धा कंबल मिलने की खुशी में बीडीओ अमरेंद्र कुमार को दुआ भी दे रही थी लेकिन वृद्धा को साथ लेकर आये विकास मित्र कैलाश सादा ने जब उनके पोते की मौत की खबर चुपके से बीडीओ को दी तो कंबल बांटने के दौरान इनकी भी आंखे भर आई. इन्होंने विकास मित्र को निर्देश दिया कि बगैर पोते की मौत की खबर बताये वृद्धा को इनके गांव अच्छे से देखभाल करते हुए पहुंचा दो. जाते-जाते भी वृद्धा खुश थी, जो गांव पहुंचते ही चीत्कार में तब्दील हो गयी. पोते के शव से लिपट कर बूढ़ी दादी घंटों रोती रही. बेटा तो तीन वर्ष पहले खो चुकी थी. अब बुढ़ापे का सहारा पोता भी चल बसा.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >