अच्छी आमदनी का श्रोत है बकरी पालन

खगडि़या. आज के दौर में बकरी पालन एक अच्छा व्यवसाय माना जा रहा है. युवा वर्ग इस व्यवसाय से जुड़ कर भी अच्छी कमाई कर रहे हैं. सबसे अच्छी बात इस व्यापार में यह है कि कम पूंजी में भी लोग बकरी पालने का फार्म खोल सकते हैं. इस व्यापार से अच्छी खासी कमाई कर […]

खगडि़या. आज के दौर में बकरी पालन एक अच्छा व्यवसाय माना जा रहा है. युवा वर्ग इस व्यवसाय से जुड़ कर भी अच्छी कमाई कर रहे हैं. सबसे अच्छी बात इस व्यापार में यह है कि कम पूंजी में भी लोग बकरी पालने का फार्म खोल सकते हैं. इस व्यापार से अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं. दूसरी ओर समय-समय पर बकरी पालने की जानकारी/प्रशिक्षण भी दी जाती है. इस संदर्भ में प्रशिक्षक डॉ अशोक कुमार झा ने बताया कि चार अच्छे नस्ल के बकरी पालने के विरुद्ध एक गाय पालने के बराबर होता है. उन्होंने बताया कि बकरी के सात नस्ल होते हैं. जिसमें उन्नत परवेड, जमुना पारी, बार बरी, बीतल, सिरोही, उश्यनावादी तथा ब्लैक बैरी है. इस नस्ल की बकरी पालने से एक बकरी के बच्चा छह माह के बाद बिक्री करने से अच्छी कीमत प्राप्त होती है. उन्होंने बताया कि बकरी के दूध के क ई गुण हैं. बकरी के दूध में फै ट नहीं होता है और इस दूध को बच्चे को पिलाने से स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है.किस तरह बकरी को पालेइन सभी नस्ल की बकरी पालने के लिए अलग-अलग व्यवस्था बनायी गयी है. उन्नत परवेड, जमुनापारी, बार बरी, बीतल, सिरोही बकरी को नाद में हरी चारा, किसी अन्न का भूसा तथा 400 से 500 ग्राम अनाज खिलाने से बकरी स्वस्थ रहती है. कैसे बचाये रोग सेबकरी को कीचड़ में नहीं जाने दें तथा पानी लगा चारा नहीं खिलायें. ऐसा करने से बकरी स्वस्थ रहती है. उन्होंने बताया कि परहेज नहीं करने पर एचएम, एफएमडी जैसे संक्रामक रोग से बकरियां ग्रसित हो सकती है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >