खगड़िया/सहरसा : ‘भाई यह क्या है, ऐसा कुछ नहीं करना. क्यों दिखा रहा है यह फंदा, क्या हो गया. अभी तक तू क्यों है दुकान में, जल्द बाहर निकल, फेंक यह फंदा’ चीखता रह गया सुमित, पर उसके आंखों के सामने छोटा भाई आयुष फांसी के फंदे से लटक गया. उसको फंदे पर तड़पता देख सुमित की चीख निकल गयी और वह वहीं बेहोश हो गया. सुमित की चीख सुन जब घर के अन्य सदस्य दौड़ कर आये तो उनके होश उड़ गये.
कमरे में सुमित बेहोश पड़ा था और उसके हाथ से गिरे मोबाइल के वीडियो कॉल पर छोटे भाई आयुष की लटकती हुई लाश दिख रही थी. इसकी सूचना चचेरे भाई को दी गयी. जब तक वह वहां पहुंचता सब कुछ खत्म हो चुका था. सहरसा के सुबोध पोद्दार की दुनिया उजड़ गयी थी. जानकारी के अनुसार उनका छोटा बेटा आयुष खगड़िया में वसुधा केंद्र चलाता था. वह चित्रगुप्तनगर थाना क्षेत्र के यूनियन बैंक के पास कई वर्षों से वसुधा केंद्र चला रहा था, जबकि उसका पूरा परिवार सहरसा के नया बाजार में रहता था.
